बोकारो थर्मल. बोकारो थर्मल के नूरी नगर स्थित डीवीसी के ऐश पौंड से छाई की ढुलाई का कार्य पांचवें दिन शुक्रवार को भी ठप. छाई ढुलाई कार्य में लगे 54 मजदूरों द्वारा न्यूनतम मजदूरी सहित अन्य मांगोंं को लेकर 17 फरवरी से आंदोलन किया जा रहा है. छाई ट्रांसपोर्टिंग बंद होने से ऐश पौंड पर हाइवा सहित सभी भारी मशीनरी खड़े हैं. छाई ढुलाई बंद रहने से डीवीसी प्रबंधन परेशान है. प्रत्येक माह किसी ना किसी बहाने से छाई ढुलाई बंद कर दी जाती है. डीवीसी मुख्यालय प्रबंधन ऐसी ही समस्याओं को लेकर बोकारो थर्मल में नये पावर प्लांट निर्माण पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहा है. दो माह से भी ज्यादा समय हो गये, परंतु ऐश पौंड जाने वाली फटे पाइप लाइन की मरम्मत नहीं हो पा रही है. डीवीसी के ऐश पौंड के इंचार्ज अभियंता पवन कुमार का कहना है कि मजदूरों ने बिना लिखित सूचना के ही छाई ढुलाई बंद कर दी है. जब भी कार्य शुरू किया जाता है तो मजदूर कांटा घर के सामने वाहनों के आगे आकर बैठ जाते हैं.
आंदोलन कर रहे मजदूरों ने कहा
ऐश पौंड में कार्यरत मजदूरों का कहना है कि छाई ट्रांसपोर्टिंग के कार्य में लगी कंपनी लॉर्डस, रिफेक्स और जेपी डब्ल्यू इंफ्रा टेक द्वारा उन्हें न्यूनतम मजदूरी नहीं दी जा रही है. पांच अक्टूबर 2024 को बेरमो सीओ संजीत कुमार की अध्यक्षता में डीवीसी के डीजीएम कार्यालय में आयोजित वार्ता में मांगों को लेकर हुए समझौते के तय बिंदुओं का पालन कंपनियाें द्वारा नहीं किया गया. वार्ता में कंपनियों के प्रतिनिधियों ने लिखित में स्वीकार किया था कि सभी 54 मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी दी जायेगी. कंपनी के वार्षिक लाभ-हानि पर बोनस भुगतान पर विचार किया जायेगा. मजदूरों को पहचान पत्र निर्गत देने, समय पर वेतन भुगतान, मासिक अवकाश को लेकर श्रम कानून का पालन करने की भी बात गयी थी.दबाव बना कर राजनीति की जा रही : सुपरवाइजर
इधर, लॉर्डस कंपनी के सुपरवाइजर श्रीराम यादव ने कहा कि मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से ज्यादा भुगतान किया जा रहा है. इसके बावजूद मजदूर मौखिक तौर पर मजदूरी में 50 रुपया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. बार-बार मजदूरों द्वारा दबाव बना कर राजनीति की जा रही है. उक्त वार्ता में मजदूरी बढ़ाने का जिक्र नहीं है. पौंड में क्षमता से भी अधिक मजदूरों को रखा गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
