जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का संदेश देता है सरहुल पर्व

Bokaro News : आदिवासी समाज द्वारा सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया.

टीटीपीएस के पुनर्वास स्थल सड़क टोला (ललपनिया) स्थित सरना स्थल में रविवार को आदिवासी समाज द्वारा सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. सर्वप्रथम नायके और कुड़ाम नायके ने जाहेर आयो सहित अन्य आराध्यों का आह्वान करते हुए बोंगा बुरु की विधि की. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच सूंडय प्रसाद का वितरण किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मंत्री योगेंद्र प्रसाद व विशिष्ट अतिथि टीवीएनएल के एमडी अनिल कुमार शर्मा थे. मंत्री ने कहा कि सरहुल पर्व आदिवासी संस्कृति, प्रकृति के प्रति आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है. यह जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की भी प्रेरणा देता है. एमडी ने कहा कि सरहुल प्रकृति, नवजीवन और भाईचारे का पावन पर्व है, जो आदिवासी संस्कृति की समृद्ध परंपरा और प्रकृति से गहरे जुड़ाव का प्रतीक है.

इसके बाद पारंपरिक नृत्य में मंत्री और एमडी ने मांदर भी बजाया और आदिवासियों के संग थिरके. मौके पर टीटीपीएस के इएसइ प्रदीप डुंगडुंग, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष लुदू मांझी, सुंदर मुर्मू सहित मांझी बाबा मंझला मुर्मू, फिनिराम सोरेन, गुरुलाल मांझी, दशरथ मार्डी, सेवाराम हांसदा, सोनाराम मांझी, रजीलाल सोरेन, जगरनाथ मरांडी, पैरा मुर्मू, बुधन सोरेन, सुरेश कुमार टुडू, तुलसीदास महतो, शिवराम हांसदा, बुधन हांसदा आदि थे.

चंद्रपुरा में सरहुल पर्व 22 को

रविवार की शाम को चंद्रपुरा जेहरा स्थान में आदिवासियों की बैठक हुई. इसमें 22 मार्च को सरहुल पर्व मनाने का निर्णय लिया गया. लखी हेंब्रम की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में तैयारी को लेकर चर्चा की गयी. कहा गया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा. बैठक में मोती मांझी, श्यामलाल किस्कू, सुरेश सोरेन, सुनील कुमार, अजय सोरेन, प्राण मरांडी आदि उपस्थित थे.

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By Janak singh choudhary

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