Bokaro News : सैटेलाइट से जल-संसाधनों का होगा प्रबंधन, पानी की कमी व प्रदूषण का भी लगेगा पता

Bokaro News : 22 मार्च विश्व जल दिवस पर विशेष : डीपीएस बोकारो के सातवीं के श्रेष्टा ने बनायी अत्याधुनिक जल मानचित्रण व निगरानी प्रणाली, भारत सरकार की इंस्पायर मानक अवार्ड योजना के लिए चयनित हुआ प्रोजेक्ट

बोकारो, भारत, विशेषकर झारखंड जैसे राज्यों में जलापूर्ति नेटवर्क के प्रबंधन में कई चुनौतियां हैं. इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए डीपीएस बोकारो की सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले श्रेष्टा चतुर्वेदी ने ऐसी तकनीक इजाद की है, जिसे अगर सही तरीके से व्यापक स्तर पर क्रियान्वित किया जाए, तो पानी की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. पानी की बर्बादी को रोकने और लोगों को पानी का महत्व समझाने के ध्येय से हर साल पूरी दुनिया 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाती है. ऐसे में श्रेष्टा चतुर्वेदी के प्रोजेक्ट की चर्चा सम सामयिक है, जिसका चयन भारत सरकार की महत्वाकांक्षी इंस्पायर मानक अवार्ड योजना के लिए किया गया है. उसे सरकार की ओर से 10 हजार रुपये की राशि भी प्रोजेक्ट को प्राथमिक स्तर पर तैयार करने के लिए सहायतार्थ प्रदान की गई है.

समुचित जल वितरण प्रणाली, पानी की कम बर्बादी

श्रेष्टा ने बताया कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी पर आधारित जियोग्राफिक इनफार्मेशन सिस्टम (जीआइएस) और रीयल-टाइम डेटा एकीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए न केवल जल-स्रोतों का समुचित प्रबंधन हो सकेगा, बल्कि पानी के प्रदूषण और जल-संकट जैसी समस्याओं के समाधान में भी सहायता होगी. इससे समुचित जल वितरण प्रणाली, पानी की कम बर्बादी, जल गुणवत्ता की बेहतर निगरानी तथा अधिक सशक्त जल आपदा प्रबंधन को सुनिश्चित किया जा सकता है. यह प्रणाली जियो स्पेशल डेटा, रीयल-टाइम निगरानी और मोबाइल एक्सेसिबिलिटी को एकीकृत करके जल प्रबंधन की दक्षता बढ़ाती है. इसके मुख्य घटकों के अंतर्गत वेब प्लेटफॉर्म पर ब्राउजर आधारित इंटरफेस डेटा विश्लेषण, मानचित्रण और प्रबंधन की सुविधा देता है.

नवोन्मेषी प्रोजेक्ट बनाने का ऐसे आया आइडिया

श्रेष्टा ने बताया कि इस तकनीक का इस्तेमाल जल प्रदूषण स्तरों की निगरानी, जल निकायों की स्थिति, कृषि, उद्योग और नगरपालिका में जल उपयोग के अनुकूलन, रिसाव, जल प्रदूषण से होने वाले खतरे को कम करने तथा बाढ़, सूखा जैसी स्थितियों में त्वरित चेतावनी आदि में किया जा सकता है. फील्ड इंजीनियर मोबाइल जीआईएस ऐप और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआइ) ओवरले के माध्यम से भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क को देख सकते हैं, जिससे मरम्मत व रखरखाव कार्य तेजी से होगा. लचर ड्रेनेज और सीवरेज सिस्टम के कारण होने वाली परेशानियों को देखते हुए इसके निदान को लेकर यह नवोन्मेषी प्रोजेक्ट बनाने का आइडिया सूझा. इसमें विद्यालय के गाइड टीचर मो. ओबैदुल्लाह अंसारी ने उसकी सहायता की और प्राचार्य डॉ एएस गंगवार के मार्गदर्शन में इस पर काम किया.

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