Bokaro News : 40 की उम्र पार कर चुके हर पांच में से एक व्यक्ति को ग्लूकोमा का खतरा

Bokaro News : जागरूकता के लिए नौ से 15 मार्च तक मनाया जाता है विश्व ग्लूकोमा सप्ताह, अब 30 से 35 साल के युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही बीमारी

बोकारो, ग्लूकोमा आंख की बीमारी है, जो ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाकर धीरे-धीरे दृष्टि को खराब करती है. ग्लूकोमा के शुरुआती चरणों में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं. उचित उपचार के बिना ग्लूकोमा अंधापन का कारण बन सकता है. पहले ग्लूकोमा 55 साल की उम्र सीमा पार करनेवालों में होती थी. अब 30 से 35 साल के युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है. 40 की उम्र पार कर चुके हर पांच में से एक व्यक्ति को ग्लूकोमा का खतरा रहता है. नियमित आंखों की जांच. शुरुआती पहचान व उपचार से दृष्टि को बचाया जा सकता है. ग्लूकोमा के करीब तीन प्रतिशत मरीज बढ़े हैं. वंशानुगत समस्या के अलावा बिगड़ी जीवनशैली व स्टेराइड का अधिक सेवन, लंबे समय तक आंखों में स्टेराइड युक्त दवा डालना प्रमुख कारण है. समय पर जांच नहीं कराने से दृष्टिहीनता भी हो सकती है. आमलोगों को जागरूक करने के लिए नौ से 15 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जाता है. यह बातें नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ जाहिद अली सिद्दीकी ने बुधवार को प्रभात खबर से विशेष बातचीत में कही. वहीं डॉ राजेश कुमार ने कहा कि ग्लूकोमा किसी को भी हो सकता है. अगर उम्र 60 साल से ज्यादा है. घर के किसी भी सदस्य को ग्लूकोमा है. आंखों पर ज्यादा दबाव या आंखों में चोट लगी है, तो ग्लूकोमा होने का जोखिम ज्यादा है. ग्लूकोमा के लक्षण व प्रकार अलग-अलग होते हैं. ग्लूकोमा का सबसे आम प्रकार में अक्सर धीरे-धीरे दृष्टि हानि के अलावा कोई असुविधाजनक या दर्दनाक लक्षण नहीं होता है. सालों तक किसी का ध्यान नहीं जा सकता है. जब तक दृष्टि हानि का पता चलता है. रोग काफी बढ़ चुका होता है. ग्लूकोमा के प्रभाव को समय पर पहचाने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच जरूरी है. डॉ पिंकी पॉल ने कहा कि आमतौर पर लोगों में एंगल क्लोजर ग्लूकोमा देखने में आता है. इसमें धुंधला या धुंधली दृष्टि, आंख व सिर में गंभीर दर्द, मतली या उल्टी (गंभीर आंख दर्द के साथ), चमकदार रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी रंग के घेरे का दिखना, अचानक दृष्टि हानि प्रमुख है. साथ ही आंखों का बढ़ा दबाव, ऑप्टिक तंत्रिका का पतला होना, आंख का बंद जल निकासी कोण, पतला कॉर्निया, ग्लूकोमा का पारिवारिक इतिहास भी प्रमुख है. मोबाइल, कंप्यूटर और टेलीविजन का शौक आंखों को बीमार बना रहा है. आंखों की बीमारी मायोपिया का खतरा भी बढ़ गया है. नजदीक की चीजें देखने में परेशानी होती है. मायोपिया मरीजों को ग्लूकोमा का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >