Bokaro News : शहर से गांव तक फगुआ बयार, चारों ओर छाई होली की मस्ती
बोकारो, बंगला में उड़ेला अबीर, अरे लाल, बंगला में उड़ेला अबीर हो बाबू आहे, बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर, बंगला में उड़ेला अबीर…गिला-सिकवा भूलने के साथ-साथ रंग-गुलाल से सबको रंगने की तैयारी में लोग जुट गये हैं. रंगों का पर्व होली चार मार्च को मनेगी. बोकारो-चास सहित शहर से लेकर गांव तक हर तरफ होली की धूम है. जगह-जगह पर होली मिलन समारोह का आयोजन हो रहा है. शहर से लेकर गांव तक फगुआ की मस्ती शाम होते हीं दिखने लगी है. गांव से लेकर शहर तक मंदिरों, स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक संगठनों द्वारा होली के गीत गाये जा रहे हैं. होली की शुभकामनाएं दी जा रही है.
जगह-जगह बज रहे गीत
हर कोई अपने अंदाज में रंगों से सराबोर होने की तैयारी कर रहा है. शहर में अबीर-गुलाल उड़ाये जा रहे हैं. इधर, बाजार में होली के गीतों के नयी सीडी भी आ चुकी है. गलियों में लाउड स्पीकरों पर फाग के गीत मन को लुभा रहे हैं. शहर से गांव तक फगुआ बयार, फिजाओं में उड़ता अबीर, गुलाल व फाग व होली के गीतों के धमाल ने रंग जमा दिया है.
गुजिया, पापड़, चिप्स, नमकीन बनाने में महिलाएं व्यस्त
होली में अब दिन नहीं कुछ घंटे ही शेष रह गये हैं. इसको लेकर फगुआ गीतों से माहौल होलियाना हो गया है. इधर, महिलाओं की व्यस्तता बढ़ गयी है. घर के अन्य कार्यों के साथ ही पूरे दिन गुजिया, पापड़, चिप्स, नमकीन बनाने में व्यस्त है. इधर, बच्चे तरह-तरह के रंग की चर्चा करने व एक-दूसरे को पिचकारी दिखाने में मशगूल दिख रहे हैं.
बाजार भी तैयार
बाजार भी सज-धजकर तैयार है. रंग, पिचकारी, अबीर-गुलाल, टोपी, मुखौटे की कई अस्थायी दुकानें के अलावा प्रतिष्ठानों में बिक्री हो रही है. बाजार लाल, गुलाबी, हरे और पीले रंगों से रंगा पड़ा है. रंगों की फुहार छोड़ने को पिचकारियां भी बेताब-हैं. मुखौटे मुंह चिढ़ा रहे हैं. बाजार में तरह-तरह की आकर्षक पिचकारी आयी है.
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