Bokaro News: एकमुश्त भुगतान के बावजूद अब तक लक्ष्य से आधी हुई धान की खरीदारी

Bokaro News: बोकारो को मिला है दो लाख क्विंटल धान खरीदारी का लक्ष्य, अबतक 101321.19 क्विंटल की हुई खरीद, धान खरीदारी के लिए 10228 किसान हैं रजिस्टर्ड, अबतक मात्र 1889 ने दिया विभाग को धान.

सीपी सिंह, बोकारो, किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदारी के संबंध में बोकारो जिले को दो लाख क्विंटल धान की खरीदारी का लक्ष्य मिला है. खरीदारी को लेकर सरकार की ओर से नियम में बदलाव किया गया है. इस बार किसानों को धान के बदले एकमुश्त भुगतान किया जा रहा है. लेकिन, एक बार फिर से विभाग लक्ष्य के करीब पहुंचता नहीं दिख रहा है. कारण यह कि धान खरीदारी का मौसम पिक से गुजर जाने के बाद भी विभाग आधा लक्ष्य ही हासिल कर सका है. विभाग ने अबतक 101321.19 क्विंटल धान की खरीदारी की है.

खरीदारी मामले में शुरुआत के 15 दिन अहम माने जाते हैं. लेकिन, अबतक रजिस्टर्ड 10228 किसानों में से 1889 किसान ही धान बेचने के लिए केंद्र तक पहुंचे. जबकि, विभाग की ओर से 9117 किसान को एसएमएस भेजा गया है. यानी विभाग की ओर से पहल के मुकाबले लगभग 12 प्रतिशत किसान ही केंद्र तक पहुंचे हैं. विभाग की ओर से 1484 किसानों को भुगतान भी कर दिया गया है. यानी सरकार ने वादा भी निभाया है. फिर भी रजिस्टर्ड किसान केंद्र तक नहीं पहुंचे हैं.

हाल के वर्षों में लक्ष्य तक नहीं पहुंचा है जिला

जिले में किसान मुख्य तौर पर दिसंबर व जनवरी में धान की बिक्री करते हैं. मकर संक्रांति, टुसू व बाउड़ी पर्व तक बोकारो में धान खरीदारी का जोर रहता है. इसके बाद धान बिक्री मामले में गिरावट आती है. धान खरीदारी लक्ष्य प्राप्ति को लेकर जिला का प्रदर्शन हाल के वर्षों में अच्छा नहीं रहा है. पिछले साल 70993.50 क्विंटल धान की खरीदारी हुई थी. वित्तीय वर्ष 2023-24 में 21743.2 क्विंटल, 2022-23 में 40939.57 क्विंटल धान की खरीदारी जिला प्रशासन की ओर से की गयी थी. 2021-22 में विभाग ने 194111 क्विंटल धान की खरीदारी की थी.

आखिर क्यों नहीं पहुंच रहे हैं किसान

इस साल किसानों से धान खरीदारी के बाद भुगतान तुरंत हो रहा है. बावजूद इसके किसान विभाग से दूर हैं. जब इसका कारण समझने की कोशिश की गयी तो बड़ा छोटा पहलू सामने आया. किसानों की माने तो विभाग की ओर से पैसा तो मिल रहा है, लेकिन सुविधा नहीं. प्राइवेट खरीदार सीधे खेत से धान लेकर जाते हैं. इससे ट्रांसपोर्ट का खर्चा बच जाता है. नमी के आधार पर धान की छंटनी नहीं होती. इस कारण कुल उपज का फायदा दिखता है. जब किसानों से पूछा गया कि इस बार विभाग से एकमुश्त व तुरंत भुगतान हो रहा है, तो किसानों पिछले कुछ साल के अनुभव के आधार पर केंद्र से दूरी रखने की बात कही.

डीएसओ शालिनी खालको से बातचीत

सवाल : इस साल भी विभाग अबतक लक्ष्य के आसपास पहुंचता नहीं दिख रहा है. रजिस्टर्ड किसान व केंद्र तक पहुंचे किसानों में बड़ा अंतर है.

जवाब : अभी समय शेष है. लक्ष्य के करीब खरीदारी होगी. जहां तक रजिस्टर्ड किसान की संख्या की बात है, यह हर दिन का प्रोसेस है. कई किसानों ने अधूरे कागजात दिये थे. इस कारण थोड़ा विलंब हुआ.

सवाल : नमी के कारण धान की कटौती, किसान को विभाग से दूर कर रहा है क्या?

जवाब : नमी का मामला शुरू में आया था. अब नमी का कोई मामला नहीं रहा. मिलर व विभाग ने मिलकर नमी के अंतर वाले मामला को दूर कर लिया है. नमी के कारण धान की कटौती होती है, क्योंकि यही धान फिर जन वितरण प्रणाली के तहत लोगों को दिया जाता है. अगर धान में अधिक नमी रहेगी तो यह जल्द ही खराब होने लगेगा.

सवाल : प्राइवेट खरीदार सीधे खेत से खरीदारी करते हैं, जबकि सरकारी स्तर पर पैक्स तक धान पंहुचाने का टेंशन रहता हैजवाब : प्राइवेट खरीदार सीधे खेत से खरीदारी करते हैं. लेकिन, इस एवज में किसानों को बहुत ही कम दर मिलता है. विभाग की तुलना में 1000 से 1200 रूपये प्रति क्विंटल कम कीमत किसान को मिलता है. यह किसानों का नुकसान देने वाला ही होता है. किसान को अपनी मेहनत को औने-पौने दाम में बेचने के बजाय विभाग तक आना चाहिए. विभाग की ओर से किसान को अब एकमुश्त राशि का भुगतान किया जा रहा है.

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