विस्थापित संघर्ष मोर्चा और झारखंड नवनिर्माण सेना के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को एडीएम भवन के समक्ष टू-टैंक गार्डन में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता राम प्रसाद मुर्मू ने की. इस अवसर पर विश्व आदिवासी दिवस, क्रांति दिवस और बोकारो कारखाना अधिसूचना दिवस भी मनाया गया. धरना से पूर्व विस्थापितों और संगठन के सदस्यों ने पैदल मार्च निकाला तथा महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की.
बोकारो कारखाना अधिसूचना दिवस की दिलायी याद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड नवनिर्माण सेना के संस्थापक गुलाब चंद्र ने कहा कि 9 अगस्त 1956 को बोकारो में इस्पात कारखाना स्थापित करने संबंधी अधिसूचना जारी की गयी थी. इसके बाद हजारों ग्रामीणों की जमीन कारखाना निर्माण के लिए अधिग्रहित की गयी. उन्होंने कहा कि उस समय विस्थापित परिवारों को रोजगार और अन्य अधिकार देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
7300 एकड़ जमीन के बदले अधिकार और रोजगार की मांग
धरना में वक्ताओं ने दावा किया कि बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए करीब 7300 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी थी. संगठन ने मांग की कि जमीन देने वाले परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार, उचित मुआवजा और रोजगार उपलब्ध कराया जाये. साथ ही लंबित मामलों का शीघ्र समाधान करने की भी मांग उठायी गयी.
संघर्ष जारी रखने का लिया संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि विस्थापितों ने बोकारो के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, लेकिन आज भी कई परिवार पुनर्वास और रोजगार की समस्याओं से जूझ रहे हैं. उन्होंने सरकार और प्रबंधन से विस्थापितों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की मांग की. कार्यक्रम में धीरेंद्रनाथ गोस्वामी, नसीरुद्दीन अंसारी, इंद्र केवट, लालबाबू अंसारी, सुखदेव मांझी, प्रतिमा देवी, रविंद्र कुमार टुडू समेत बड़ी संख्या में विस्थापित और संगठन के कार्यकर्ता मौजूद थे.
