Bokaro News : उत्पादन लक्ष्य से पीछे है बोकारो कोलियरी

Bokaro News : सीसीएल बीएंडके एरिया की बोकारो कोलियरी डीडी माइंस के विस्तार के लिए शिफ्टिंग प्रक्रिया लगभग रुक गयी है. उत्पादन कार्य पर भी ब्रेक लग गया है.

गांधीनगर. सीसीएल बीएंडके एरिया की बोकारो कोलियरी डीडी माइंस के विस्तार के लिए शिफ्टिंग प्रक्रिया लगभग रुक गयी है. उत्पादन कार्य पर भी ब्रेक लग गया है. इससे प्रबंधन की चिंता बढ़ गयी है. मंगलवार को पीओ एनके सिंह, खान प्रबंधक संजय सिंह, कार्मिक प्रबंधक एसडी रत्नाकर, सुरक्षा अधिकारी वीके पंडित, शिफ्टिंग इंचार्ज कौशल किशोर सिंह, ओवरमैन अशोक सिंह, सुरक्षा अधिकारी चंद्रदेव व अन्य अधिकारियों ने चार नंबर शिफ्टिंग एरिया क्षेत्र में जाकर यहां रह रहे दिहाड़ी मजदूरों से बात की. जल्द शिफ्ट होने की बात कही.

मालूम हो कि चालू वित्तीय वर्ष में परियोजना को तीन लाख टन उत्पादन का लक्ष्य मिला है. लेकिन अभी तक एक लाख 70 हजार टन ही उत्पादन हो पाया है. वर्तमान में माइंस विस्तार के लिए चार नंबर के रिहायशी क्षेत्र में बेरमो दक्षिणी पंचायत के पंचायत सचिवालय के अलावा एक आंगनबाड़ी केंद्र तथा दो सामुदायिक भवनों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. सीसीएल द्वारा झारखंड सरकार के पास निर्धारित राशि जमा करते ही इन भवनों को तोड़ दिया जायेगा. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यहां रह रहे दिहाड़ी मजदूरों एवं सीसीएल कर्मियों को शिफ्ट करने की है. सीसीएल कर्मियों को तो प्रबंधन द्वारा आवास मुहैया कराया जा रहा है. नये वित्तीय वर्ष में परियोजना के विस्तार के लिए 132 आवासों को हर हाल में हटाना होगा. इसमें 29 सीसीएल कर्मियों के हैं तथा बाकी में अन्य लोग रह रहे हैं. मालूम हो कि चार नंबर क्षेत्र से लगभग 500 दिहाड़ी मजदूरों को पुराना एक्सकैवेशन के समीप शिफ्टिंग एरिया में पूर्व में बसाया गया है. सरकारी भवनों एवं एवं बाकी बचे लगभग 300 आवासों को शिफ्ट कराया गया तो पांच-छह वर्षों तक माइंस चलना संभव हो पायेगा. इधर, यहां वर्षों से रह रहे दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि प्रबंधन द्वारा सारी सुविधाएं देकर हम लोगों को यहां से हटाया जाये.

शिफ्टिंग नहीं हुई तो उच्च प्रबंधन ले सकता है कड़ा निर्णय : पीओ

पीओ एनके सिंह ने कहा कि शिफ्टिंग नहीं होने से उत्पादन पर पूर्ण रूप से ब्रेक लग गया है. इस वर्ष परियोजना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पा रही है. नये वित्तीय वर्ष में शिफ्टिंग नहीं हुई तो उच्च प्रबंधन परियोजना को चलाने को लेकर कड़े निर्णय भी ले सकता है. श्रमिक यूनियनों से भी माइंस विस्तार एवं शिफ्टिंग में सहयोग की अपेक्षा है.

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