हुआ ब्लास्ट, बजा सायरन... 02 मिनट में एक्टिव हुआ सुरक्षा तंत्र

बोकारो में आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। सुरक्षा तंत्र की तत्परता और आम लोगों की लापरवाही की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

बोकारो. स्थान: ऊषा पेट्रोल पंप. समय - शाम के 07:01 बजे. अचानक से बम धमाका की आवाज सुनाई दी. मानो कोई आतंकी या देश विरोधी हमला हो गया हो. धमाका के फौरन बाद धीमा व तेज के अंतराल में सायरन बजने लगा. 02 मिनट तक सायरन बजने के फौरन बाद इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर एक्टिव हुआ.

पेट्रोल पंप की लाइट बुझा दी गई. इसके बाद दनादन पुलिस अधिकारी की सायरन बजाती काफिला का प्रवेश हुआ. धमाका के कारण हुई आगजनी को बुझाने के लिए दमकल की एक गाड़ी पहुंची. 07:06 मिनट तक आग पर काबू पा लिया गया. इधर सुरक्षा दल ने घायलों को ढूंढ कर फर्स्ट एड की सुविधा प्रदान की.

आपात स्थिति में रस्सी, बांस व अन्य की मदद लेकर स्ट्रेचर बनाया गया. 07:12 बजे एक- एक कर 04 मल्टी ऑपरेशनल एम्बुलेंस घटना स्थल पर पहुंची. सभी घायलों को लेकर नजदीक के हॉस्पिटल में शिफ्ट किया. 07:27 बजे तक सभी घायल को हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया. इसी दौरान बोकारो डीसी अजय नाथ झा भी घटना स्थल पर पहुंचे. स्थिति पर फौरन काबू पाने संबंध में जरूरी दिशा निर्देश दिया. बुधवार को आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला में दो जगह ऊषा पेट्रोल पंप और मेडिकेंट हॉस्पिटल में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. लगभग 35 मिनट तक चले ड्रिल में 29 टीम ने हिस्सेदारी ली. ये अलग बात है कि ब्लैक आउट के नाम पर बगल में ही स्थित एयरपोर्ट की लाइट बंद करने में अतिरिक्त 03 मिनट का समय लग गया. हालांकि, टीम की रिस्पॉन्डिंग टाईम कमाल की रही. ब्लैक आउट को छोड़ दे तो, सभी ने बेहतर तरीका से काम किया. जिला प्रशासन की ओर से ड्रिल का आयोजन किया गया. इस संबंध में कई दौर की बैठक हुई, प्रेस वार्ता हुई. आम लोगों से सहभागिता की अपील की गई. ड्रिल वाले स्थान से गुजरने वाले लोगों से अपील की गई कि सभी वाहन का हेड लाइट बंद कर लेंगे. लेकिन, आम लोगों ने ड्रिल को मेला के रूप में लिया. हेड लाइट बंद करना तो दूर कई लोग मॉक ड्रिल के दौरान रील बनाने लगे. कई लोग बेवजह भीड़ बढ़ाने वाला काम किया. हद तो तब हो गई जब एबुलेंस को भी बाहर निकलने में हॉर्न का प्रयोग करना पड़ा. इसी तरह अग्निशमन की गाड़ी भी प्रवेश के दौरान भीड़ के कारण सहमी रफ्तार में ही आई. बोकारो को बौद्धिक नगरी कहा जाता है, लेकिन मॉक ड्रिल के दौरान ऐसा कुछ नहीं दिखा. ड्रिल को लेकर 29 टीमें शामिल रही. इन टीमों को डीसी, एसपी, डीडीसी, सीसीआर व मुख्यालय डीएसपी, एसी, चास ननि के अपर नगर आयुक्त, जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, चास एसडीओ, चास सीओ, जिला अग्निशमन पदाधिकारी, डीटीओ, भू-संरक्षण पदाधिकारी, नजारत पदाधिकारी, एक्जिक्युटिव मजिस्ट्रेट, बीएसएनएल के जिला प्रमुख, डीएसओ व सिविल सर्जन विभिन्न टीम को संचालित किया.


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Author: C p singh

Published by: Kumarvishwat Sen

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