Bokaro News : लैंड इश्यू के कारण एकेके का उत्पादन लक्ष्य घटाया गया

Bokaro News : सीसीएल बीएंडके एरिया : माइंस विस्तार के लिए बरवाबेड़ा गांव को गोविंदपुर फेज दो में किया जाना है शिफ्ट

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राकेश वर्मा, बेरमो :

कोल इंडिया की मेगा प्रोजेक्ट में शुमार एकेके परियोजना में माइंस विस्तार को गति नहीं मिल रही है. यहीं कारण है कि चालू वित्तीय वर्ष में सीसीएल मुख्यालय ने एकेके परियोजना से कोयला उत्पादन का एपीपी टारगेट को कम कर 50 लाख टन कर दिया है. जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में 75 लाख टन का लक्ष्य था जिसमें से 51 लाख टन उत्पादन किया गया. पूरे एरिया ने 83.57 लाख टन कोयला उत्पादन किया था जिसमें 70 फीसदी उत्पादन एकेके ने किया था. हालांकि प्रबंधन का कहना है कि जल्द ही यहां माइंस विस्तार को गति मिलेगी. प्रथम फेज में बरवाबेड़ा गांव के दरगाह मोहल्ला से 60-70 लोगो को नये आरआर साइट में शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरु की जायेगी. इसके अलावा डीवीसी के 33 हजार केवी तार के शिफ्टिंग की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. अब सिर्फ तार को रेलवे लाइन का पार करना है. मालूम हो कि एकेके परियोजना विस्तार के लिए माइंस से सटे बरवाबेड़ा गांव यहां से तीन किमी दूर केएसपी फेज दो परियोजना में सभी को शिफ्ट किया जाना है. कंपनी नार्मस के तहत प्रबंधन को मुआवजा सहित अन्य तरह की सुविधाओं के साथ सभी को नये स्थल में शिफ्ट करना है.जिस नये स्थल में बरवाबेड़ा गांव दरगाह मुहल्ला को शिफ्ट किया जाना है, वहां करीब 20 करोड़ की लागत से शिफ्टिंग का कार्य संबंधित संवेदक ने किया है.

बरवाबेड़ा गांव की शिफ्टिंग के बाद मिलेगा 40 मिलियन टन कोयला

केएसपी फेज दो स्थित नये आरआर साइट (पुनर्वास स्थल) में बसने वाले लोगों को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सीसीएल ने करीब 20 करोड़ रुपये खर्च किये हैं. बरवाबेड़ा गांव की शिफ्टिंग के बाद सीसीएल को इस गांव के भू-गर्भ से करीब 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. बरवाबेड़ा गांव के करीब 250 घरों को शिफ्ट किया जाना है. शिफ्ट होने वाले लोगों को नये पुनर्वास स्थल में पांच-पांच डिसमिल जमीन प्लॉटिंग कर दिया गया है. घर के एवज में मुआवजा देना है, जिसके लिए प्रबंधन के पास सीसीएल मुख्यालय से फंड आकर पड़ा हुआ है. इधर, नये पुनर्वास स्थल में बरवाबेड़ा गांव को शिफ्ट किये जाने का विरोध गोविंदपुर के विस्थापित रैयत कर रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी जमीन 80 के दशक में सीसीएल ने अधिग्रहीत की थी और 84 विस्थापितों को नौकरी देने का एग्रीमेंट हुआ था. शुरुआती दौर में 63 लोगों को नौकरी दी गयी. 21 लोगों को नौकरी अभी तक नहीं मिली है. ऐसे में पुनर्वास स्थल की जमीन हमारी है. जब तक बकाया नौकरी नहीं मिलेगी, यहां बरवाबेड़ा गांव के लोगों को प्लॉटिंग नहीं करने देंगे.

क्या कहते हैं महाप्रबंधक

सीसीएल बीएंडके एरिया के महाप्रबंधक संजय कुमार झा ने कहा कि लैंड इश्यू के कारण एकेके का कोल प्रोडक्शन लक्ष्य कम किया गया है. माइंस विस्तार को लेकर प्रबंधन गंभीर है. जल्द ही बरवाबेडा के दरगाह मोहल्ला के 60-70 लोगों को पहले फेज में नये आरआर साइट में शिफ्ट किया जायगा. डीवीसी का 33 हजार केवी का ओवरहेड तार की शिफ्टिंग प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है. सिर्फ रेलवे लाइन को पार करना है.

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