बोकारो जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिले की 800 दवा दुकानें बुधवार को बंद रहीं. इससे छह करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ. हालांकि नर्सिंग होम व निजी अस्पतालों की दवा दुकान खुली रहीं. सरकारी अस्पतालों के दवा काउंटर में भी आम लोगों के लिए दवाइयां उपलब्ध रखी गयी थी. इसके बाद भी आमलोगों पर बंदी का जबरदस्त असर देखा गया.
इधर, दवा दुकानदारों ने प्रदर्शन के माध्यम से ऑनलाइन दवा बिक्री और नयी दवा नीति का विरोध किया. सेक्टर चार लक्ष्मी मार्केट में सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक दवा व्यवसायी बैठे रहे. महासचिव सुजीत चौधरी ने कहा कि सरकार ऑन लाइन दवा बिक्री को बंद करे. यह आम लोगों के लिए घातक है. इ-फार्मेसी के लिए अब तक सख्त नियम नहीं बनाये गये हैं. इससे नकली व अवैध दवाओं की बिक्री का खतरा लगातार बढ़ रहा है. सरकार की नयी नीति से छोटे दवा दुकानदारों के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. सरकार को दोबारा विचार करने की जरूरत है.अध्यक्ष सुभाष चंद्र मंडल ने कहा कि औषधि व्यापार व जनस्वास्थ्य से जुड़े कई गंभीर मुद्दे अब तक अनसुलझे हैं. इससे केमिस्ट व आश्रितों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. अवैध इ-फार्मेसी संचालन व 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना वापस ली जाये. बड़े कॉरपोरेट्स द्वारा प्रिडेटरी प्राइसिंग पर रोक लगे.
दवा विक्रेताओं ने कहा
दवा विक्रेताओं ने कहा कि बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की बिक्री की जा रही है. एक ही परचे का बार-बार दुरुपयोग किया जा रहा है. एंटीबायोटिक्स व आदत बनाने वाली दवाओं की अनियंत्रित उपलब्धता है. नकली अथवा सत्यापन योग्य न होने वाले प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग, फार्मासिस्ट व रोगी के बीच प्रत्यक्ष संवाद का अभाव, विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों में कमजोर नियामक नियंत्रण, नकली व अनुचित भंडारण वाली दवाओं का जोखिम व एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस का बढ़ता खतरा प्रमुख है. मौके पर निसार आलम, प्रेम कुमार सिंह, रंजीत जायसवाल, सुनील कुमार शर्मा, ज्योति समरेंद्र, सुमंत पांडेय, जगदीश प्रसाद, अतेंद्र सिंह, सतीश सिंह, धीरज, चितरंजन चटर्जी, विनोद वर्णवाल, प्रह्लाद प्रजापति सहित दर्जनों दवा व्यवसायी मौजूद थे. सिविल सर्जन डॉ अभय भूषण प्रसाद ने कहा कि दवा दुकानों की बंदी का असर आम लोगों पर नहीं पड़ा है. जरूरत की दवाओं को सरकारी अस्पतालों के काउंटर पर भी उपलब्ध रखा गया था.
