नगर निगम ने ढाई वर्ष में भी नहीं कराया तालाबों का सौंदर्यीकरण

चास : चास नगर निगम की ओर से करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी भी सरकारी तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं कराया गया. इस कारण अधिकांश तालाबों की स्थिति काफी दयनीय है. तालाब के पानी का रंग भी बदल गया है. गौरतलब हो कि नौ अगस्त 2017 को बोकारो डीसी के निर्देश पर […]

चास : चास नगर निगम की ओर से करीब ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी भी सरकारी तालाब का सौंदर्यीकरण नहीं कराया गया. इस कारण अधिकांश तालाबों की स्थिति काफी दयनीय है. तालाब के पानी का रंग भी बदल गया है. गौरतलब हो कि नौ अगस्त 2017 को बोकारो डीसी के निर्देश पर मत्स्य विभाग की ओर से 18 तालाबों का हस्तांतरण चास नगर निगम को किया था.

फिलहाल निगम आधा दर्जन तालाबों का मत्स्य पालकों को बंदोबस्ती कर सिर्फ राजस्व जुटा रहा है. प्राप्त राजस्व से किसी भी तालाब के विकास पर खर्च नहीं किया गया. तालाब में नहाने से लोग खुजली व चर्म रोग सहित कई बीमारियों की चपेट में आ रहे है.

तालाबों में गिरता है नाली का पानी : निगम क्षेत्र के अधिकांश तालाबों में नाली का गंदा पानी गिराया जा रहा है. इसके कारण कई तालाब अधिक दूषित हो गये हैं. सोलागीडीह तालाब व भोलूर बांध तालाब की स्थिति काफी दयनीय है. एनएच-32 के निर्माण के दौरान जोधाडीह मोड़ सहित अन्य कॉलोनियों का पानी सोलागीडीह तालाब में सीधे बहाया जा रहा है.
वहीं दूसरी ओर रामनगर कॉलोनी स्थित महतो बांध कचरा से पटा हुआ है. स्थानीय लोगों ने निगम को कई बार पत्राचार कर तालाब की सफाई की मांग की, लेकिन इस दिशा में निगम ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखायी.

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