बोकारो : विश्व का हृदय भारतवर्ष देश है. यहां का चप्पा-चप्पा देव भूमि है. सनातन धर्म के कारण ही भारत टिका है. सनातन धर्म में ही समस्त प्राणियों के लिए भाव दिखाया जाता है. पूरा विश्व परिवार है यह इसकी सोच है.
यह बात गोवर्द्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाभाग ने कही. शुक्रवार को लोहांचल में शंकराचार्य धर्म सभा में बोल रहे थे. स्वामी निश्चलानंद ने कहा : पृथ्वी भगवान की अभिव्यक्ति है. सनातन धर्म के अलावा कोई धर्म नहीं है, बल्कि वह धर्मावास है.
शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा : भारत में रामराज्य की स्थापना के लिए देश को एक विचार में आना पड़ेगा. सभी शंकराचार्य की देखरेख में चार दिशाओं के लिए अलग-अलग नेतृत्व मिलना चाहिए था. सामान विचार के कारण देश एकजुट रहता. लेकिन, वर्तमान में ममता अलग बोलती है, मायावती अलग बोलती हैं.
नेतृत्व भटक जाता है. केंद्र में भी गुटबंदी है. तालमेल नहीं है. देश तीर्थभूमि है, यहां मलेच्छों का वास नहीं हो सकता है. धर्म के साथ चलने वालों से ही देश की भलाई हो सकती है. शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा : देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि राम व रहीम की भक्ति की जगह भारत भक्ति करने का समय है.
लेकिन क्या जो राम का भक्त नहीं है, क्या वह भारत का भक्त हो सकता है. कहा : अगर कुआं में भांग घोल दिया जाये, तो समस्त गांव पर इसका असर तो होगा ही. कहा : आधुनिक शिक्षा नीति से बच्चों में विकृति आ रही है. जहां जो चीज नहीं पहुंचनी चाहिए, वह पहुंच रही है. हर कुछ आधुनिकता के रंग में रंग कर बर्बादी की कगार पर पहुंच रहा है.
बच्चों पर माता ज्यादा प्रभावी
शंकराचार्य निश्चलानंद ने कहा : बच्चों पर माता का प्रभाव ज्यादा रहता है. महाभारत से लेकर हर काल में इसका असर दिखा है. मां सावधान हो तो बच्चों को संस्कारी बनाया जा सकता है. आधुनिक तकनीकी युग में बच्चों में अध्यात्म की ज्ञान तकनीक से ही दी जा सकती है. कहा : माता-पिता का अच्छा कर्म ही बच्चों को भविष्य में शास्त्रीय मार्ग पर आगे ले जा सकता है. अन्यथा भटकाव से कोई नहीं रोक सकता. मौके पर दर्जनों लोग मौजूद थे.
