जनप्रतिनिधियों व सुपरवाइजरों का एक वर्ष का बकाया है मानदेय
चास : चास नगर निगम की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं. फिलहाल नगर निगम को बिजली बिल सहित मानदेय भुगतान में 30 करोड़ रुपये भुगतान करना है. जबकि निगम को मार्च तक विभिन्न मदों में तीन करोड़ रुपये ही राजस्व की प्राप्ति होने की संभावना है. वार्ड पार्षदों व सुपरवाइजरों को बीते एक वर्ष से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है.
इन सभी को मानदेय भुगतान करने के लिए निगम को छह करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी पड़ेगी. वहीं दूसरी ओर नगर निगम को बिजली विभाग का 24 करोड़ रुपये बिजली बिल के रूप में बकाया है. बकाया बिजली बिल जमा करने के लिए विभाग की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है. बताया जाता है कि बिजली विभाग का जलापूर्ति योजना व स्ट्रीट लाइटों का बिजली बिल बीते पांच वर्ष से अधिक समय का बकाया है.
पानी बिल आठ करोड़ रुपये वसूली करने में विफल है निगम : नगर निगम की ओर से चास पेयजलापूर्ति 2015 में शुरू की गयी थी. अभी तक पांच हजार घरों में निगम की ओर से पानी पहुंचाया जाता है. लेकिन पानी कनेक्शन लेने वाले लोग इसका बिल सहूलियत से निगम को जमा नहीं कर रहे हैं. इसकी वजह से नगर निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ते जा रहा है. फिलहाल लोगों के पास जल बिल के रूप में आठ करोड़ रुपये बकाया है. इसकी वसूली करने में नगर निगम विफल है.
पीएम आवास में अभी तक निगम ने खर्च किया है 80 करोड़ रुपये : नगर निगम की ओर से वित्तीय वर्ष 2015-16 से लेकर अब तक 5879 जरूरतमंद लोगों को पीएम आवास योजना का लाभ दिया है. इसमें से 4981 आवास का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है, या निर्माण कार्य चल रहा है. अभी तक लाभुकों को आवास निर्माण के लिये 80 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. निर्माणाधीन आवास को पूर्ण करने का निर्देश निगम लगातार दे रहा है. ताकि छूटे शेष लाभुकों को नये सिरे से आवास योजना का लाभ दिया जा सके.
