जान जोखिम में डाल स्कूल जाते हैं बच्चे

घटना के बाद सक्रिय होता है प्रशासन नियमों का नहीं होता है पालन चास : स्कूली वाहनों ऑटो व वैन में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को भरकर ले जाने का मामला कोई नया नहीं है. कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें विद्यार्थी की मौत व घायल भी हुए हैं. इसके बाद भी ना […]

घटना के बाद सक्रिय होता है प्रशासन

नियमों का नहीं होता है पालन

चास : स्कूली वाहनों ऑटो व वैन में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को भरकर ले जाने का मामला कोई नया नहीं है. कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें विद्यार्थी की मौत व घायल भी हुए हैं. इसके बाद भी ना तो जिला प्रशासन और ना ही ट्रैफिक पुलिस इस मामले में गंभीर है. वहीं परिवहन विभाग भी ऐसे वाहनों को छूट देकर रखी हुई है.

स्थिति यह है कि स्कूली वाहनों और ऑटो में ओवरलोड बच्चे बैठाये जा रहे हैं. भेड़-बकरियों की तरह बैठाकर व पीछे साइड में लटकाकर घर से स्कूल और स्कूल से घर तक लाते ले जाते हुए रोजाना देखा जाता है. इसके बाद भी बच्चों की जान जोखिम में डालकर बच्चों को खतरों भरा सफर कराने वालों पर कार्रवाई तो दूर इन्हें पुलिस और परिवहन विभाग की ओर से टोका भी नहीं जाता है.

जबकि बीते वर्ष सात मई को बोकारो स्टील सिटी सेक्टर-5 में भी ऑटो पलने से तीन छात्रा गंभीर रूप से घायल हुई थी. इस दौरान प्रशासन की ओर से ऑटो में बच्चों को बैठाने के लिये नियम बनाये गये थे, लेकिन प्रशासन अपने ही बनाये नियमों का पालन कराने में विफल है. घटना के बाद ही प्रशासन जागती है.

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