300 साल पुरानी है कोलबेंदी में 16 दिन चलने वाली दुर्गा पूजा

चास : चास प्रखंड के कोलबेंदी गांव में तीन अक्तूबर को बारी स्थापना के साथ दुर्गा मां की पूजा शुरू हो गयी है. प्राय: जगह 10 दिनों तक दुर्गा पूजा होती है, जबकि यहां 16 दिनों तक पूजा की जाती है. 17वें दिन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है. कोलबेंदी में पूजा की […]

चास : चास प्रखंड के कोलबेंदी गांव में तीन अक्तूबर को बारी स्थापना के साथ दुर्गा मां की पूजा शुरू हो गयी है. प्राय: जगह 10 दिनों तक दुर्गा पूजा होती है, जबकि यहां 16 दिनों तक पूजा की जाती है. 17वें दिन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है.
कोलबेंदी में पूजा की यह परंपरा 300 वर्ष पुरानी है. यहां जिउतिया पर्व के पारण के दिन बुधन कलश स्थापना व बकरा बलि देकर पूजा शुरू की
होती है. सप्तमी से मूर्ति की पूजा शुरू होती है, जबकि पंचमी से नवमी तक प्रत्येक दिन बकरों की बलि दी जाती है. नवमी के दिन दो सौ से ज्यादा भेड़-बकरों की बलि दी जाती है. यह मंदिर तीन सौ वर्ष से ज्यादा पुराना है. इसकी स्थापना गांव के जमींदार ठाकुर किशन देव ने की थी.
एक ही पटरा पर बनती हैं 10 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं : कोलबेंदी में एक ही पटरा पर 10 देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है. इनमें मां दुर्गा के अलावा लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश, कार्तिक, जया, विजया, महिषासुर, भैंसासुर आदि
की प्रतिमाएं होती हैं. साथ ही देवी-देवताओं के वाहनों की प्रतिमाएं भी
उसी पटरे पर होती है. मूर्तिकार द्वारा मंदिर में ही मूर्तियों का निर्माण किया जाता है.
लोगों के आस्था का केंद्र है यह मंदिर : कोलबेंदी सहित आसपास के गांवों में यह मंदिर काफी लोकप्रिय और लोगों के आस्था का केंद्र है. विजया दशमी के दिन यहां मेला लगता है, जिसमें 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ होती है. माना जाता है कि इस मंदिर में मन्नत मांगने वाला कभी खाली हाथ नहीं लौटा.
जमींदार परिवार के लोग करते हैं आयोजन : 300 साल पुराने इस मंदिर में जमींदार किशन देव के
वंशज ही पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू से करते आ रहे हैं. वर्तमान में दुर्गा प्रसाद देव, प्रताप देव, विजय कुमार देव, जन्मेंजय देव, नंदकिशोर देव, जगन्नाथ देव, दीपक देव, अशोक देव, राजकुमार देव, प्रदीप देव, अमर शंकर देव आदि पूजा की व्यवस्था में एक महीने से लगे हुए हैं.

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