बीएसएल के 2000 सहित सेल के 15 हजार अधिकारी पेंशन, वेज रिविजन, लीव इंकैशमेंट की डिमांड कर रहे हैं. बोसा से लेकर सेफी स्तर तक अधिकारियों कर आवाज लगातार उठायी जा रही है. बीएसएल के अधिकारी पेंशन, वेज रिवीजन, लीव इनकैशमेेंट सहित सुरक्षा व मूलभूत सुविधाओं की भी मांग कर रहे हैं.
ऑफिसर कॉलोनी में चोरी, छिनतई, छेड़खानी की घटना से अधिकारी दहशत में हैं. अधिकारियों की डिमांड कब पूरी होगी? पेंशन योजना कब से लागू होगी? वेज रिवीजन कब होगा? लीव इनकैशमेंट शुरू होगा या नहीं? कैसे मिलेगी सुरक्षा? इन सवालों को लेकर ‘प्रभात खबर’ के वरीय संवाददाता सुनील तिवारी ने मंगलवार को बोसा अध्यक्ष एके सिंह से विस्तृत बातचीत की. प्रस्तुत है बातचीत का मुख्य अंश.
प्रश्न : बीएसएल समेत सेल अधिकारियों के लिए पेंशन स्कीम कब से शुरू होगी? पेंशन का मामला कहां बाधित है?
उत्तर : इस्पात मंत्री ने सेल व आरआइएनएल में पेंशन लागू करने के लिए इन प्रिंसिपल एप्रूवल दे दिया है. पेंशन के क्रियान्वयन के लिए सेल व आरआइएनएल को दो माह की मोहलत दी गयी है. इन दो महीनों में दोनों कंपनियों को पेमेंट का रोडमैप तैयार कर इस्पात मंत्रालय को सौंपना है.
रोड मैप पर मंत्रालय की सहमति के बाद मंत्री एप्रूवल देकर पेंशन को हरी झंडी देंगे. यह भी स्पष्ट है कि दोनों कंपनियों को किसी प्रकार का लोन लेकर पेंशन नहीं देना है और न ही सरकार इसमें कोई सहयोग करेगी. कंपनियों को ही पेंशन की व्यवस्था करनी होगी. उम्मीद है कि अक्तूबर 2018 तक पेंशन को लेकर सकारात्मक रिजल्ट आयेगा. कंपनी रोड मैप तैयार कर रही है.
प्रश्न : वेज रिवीजन कब होगा? इसमें सबसे बड़ी बाधा क्या है? बोसा व सेफी इसमें क्या पहल कर रहे हैं?
उत्तर : सेल व आरआइएनएल में वेज रिवीजन में सबसे बड़ी बाधा सरकार की ओर से जारी आदेश एफोर्डिबिलीटी क्लाउज है. इसके तहत अगर कोई कंपनी लगातार तीन वर्ष तक घाटे में है तो उसके कर्मियों का रिवीजन नहीं होगा. इस क्लाउज का विरोध बोसा व सेफी लगातार कर रहे हैं. बोसा के प्रयास से दो दर्जन से अधिक सांसदों ने सरकार को पत्र लिख कर क्लाउज को बदलने का अनुरोध किया है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है. विडंबना है कि अगर 10 वर्ष में नौ साल प्रोफिट व 10वें साल घाटा होगा तो भी रिवीजन नहीं होगा. इससे पब्लिक सेक्टर के अधिकारी व कर्मी असंतुष्ट हैं व ठगा महसूस करते हैं.
प्रश्न : वेज रिवीजन कब से बकाया है? रिवीजन की स्थिति कब और कैसे बन सकती है? अधिकारी की भूमिका क्या होगी?
उत्तर : वेज रिवीजन नहीं होने का असर कंपनी के कामकाज पर दिखता है. बीएसएल सहित सेल अधिकारियों का रिवीजन 01 जनवरी 2017 से लंबित है. 10 वर्ष के रिवीजन के बाद अगर जल्द रिवीजन नहीं होता है तो आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है. एक भय का माहौल बन जाता है. एक कमजोर सिपाही युद्ध नहीं कर सकता है.
आज के परिदृश्य में सेल व आरआइएनएल को हर हाल में वर्ष 2018-19 में एक बहुत बड़ा प्रोफिट करना होगा. मतलब, प्रोफिट आफ्टर टैक्स लगभग चार हजार करोड़ का करना होगा. इसमें अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. तब जाकर 19 अप्रैल से एफोर्डिबिलीटी क्लाउज स्वत: समाप्त हो जायेगा. वर्ष 2016-17 में सेल को 2833 व 2017-18 में 482 करोड़ का घाटा हुआ है.
प्रश्न : लीव इनकैशमेंट कब से शुरू होगा? इसके बंद होने से क्या घाटा हो रहा है?
उत्तर : सेल सहित बीएसएल प्रबंधन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए कि संयंत्र के अधिकारी व कर्मी व कर्मचारी ही कंपनी के सबसे बड़े संसाधन हैं. अगर पेंशन व वेज रिवीजन नहीं कर पा रहे हैं तो कम से कम लीव इनकैशमेंट तत्काल चालू करना चाहिए. इससे रिटायर हो रहे अधिकारी व कर्मी को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.
साथ ही कार्यरत अधिकारी-कर्मी को भी कई तरह का लाभ मिलेगा. कंपनी की आर्थिक स्थिति का हवाला देकर लीव इनकैशमेंट बंद किया गया है, जो अनुचित है. जब सभी रिसोर्स पर खर्च हो रहा है तो ह्यूमन रिसोर्स पर क्यों नहीं? कब तक अधिकारी व कर्मी को दबा कर रखा जायेगा? बोसा इसे लेकर गंभीर है.
प्रश्न : बीएसएल अधिकारियों की सुरक्षा का क्या मामला है? बोसा इसके लिए क्या कदम उठा रहा है?
उत्तर : सेक्टर 4 एफ, 4 जी, 4 डी, 4 सी, 6 ए सहित अन्य ऑफिसर कॉलोनी में आये दिन चोरी, छिनतई, छेड़खानी की घटना हो रही है. अधिकारियों के सेक्टरों में जनसंख्या कम होने के कारण अपराधियों का मूवमेंट बढ़ गया है. अधिकारी जब प्लांट में रहते हैं या घर में सोये रहते हैं, तब ऐसी घटना हो रही है. इससे अधिकारियों में दहशत व्याप्त है. बोसा ने प्रबंधन को पत्र लिख कर सेक्टर 4 एफ की बाउंड्रीवॉल कराने की मांग थी. इससे लगभग 1500 अधिकारियों का आवास सुरक्षित हो जाता. अभी हाल में ही बोकारो विधायक के नेतृत्व में बोसा का एक प्रतिनिधिमंडल एसपी बोकारो से मिला और ऑफिसर कॉलोनी में सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का आग्रह किया.
प्रश्न : बीएसएल के अधिकारियों की मूलभूत सुविधाओं का मामला क्या है? बोसा इसके लिए क्या पहल कर रहा है?
उत्तर : इधर, कुछ वर्षों से कंपनी की स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण क्वार्टर मरम्मती समेत मूलभूत सुविधाओं के काम पर रोक लगी थी. अब समय आ गया है कि ह्यूमन रिसोर्स की बुनियादी सुविधा पर भी खर्च हो. अगर, पेंशन व वेज रिवीजन में देर हो रही है तो कम से कम मूलभूत सुविधा तो अधिकारी-कर्मी को दी जाए. बोसा ने प्रबंधन से क्वार्टरों की मरम्मती, किचन-बाथरूम में टाइल्स लगाने आदि की मांग की थी. साथ ही बिजली के पावर डिस्ट्रीब्यूशन पर अब खर्च करने की जरूरत है. इसके लिए बोसा लगातार प्रयासरत है. बहुत जल्द सकारात्मक पहल होगी.
प्रश्न : सेफी चुनाव का क्या मामला है? अब तक चुनाव क्यों नहीं हुआ? चुनाव नहीं होने से अधिकारियों के डिमांड पर प्रभाव?
उत्तर : सेफी का टर्म 08 मई 2018 को समाप्त हो गया है. अभी तक चुनाव नहीं हुआ है. वर्ष 2015-17 के काउंसिल प्रस्ताव के अनुसार अप्रैल-2018 से पहले चुनाव करा लेने की बात थी. सेफी का चुनाव जून-2018 तक करा लेना था. अगर ऐसा नहीं हुआ तो 01 जुलाई 2018 से सेफी का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा. ऐसे में सेल प्रबंधन अब सेफी को क्यों इंटरटेन कर रहा है? प्रबंधन को बोलना चाहिए कि अब नयी कमेटी के साथ बात होगी. सेफी का चुनाव नहीं होने कारण अधिकारियों की डिमांड पर भी असर पड़ना शुरू हो गया है. हालांकि, बोसा अपनी ओर से बीएसएल से लेकर सेल व इस्पात मंत्रालय तक अधिकारियों की आवाज उठा रहा है.
