बोकारो : भारतीय स्टेट बैंक प्रशासनिक भवन शाखा का 71 लॉकर काटकर करोड़ो के जेवरात चोरी होने की घटना बोकारो ही नहीं राज्य में हुई चोरी की अब तक की सबसे बड़ी घटना है. स्थानीय लोगों को घटना की जानकारी मिली तो शहर में कोहराम मच गया. लॉकर कांड के पीड़ित दर्जनों लोग अपने जीवन की गाढ़ी कमाई गंवा कर बैंक के सामने छाती पीट कर बैंक व पुलिस को कोसने लगे.
घटना भी ऐसी थी कि लोगों का गुस्सा जायज था. इस घटना के महज कुछ दिनों पूर्व जिले में नये एसपी कार्तिक एस की पदस्थापना हुई थी. एसपी ने पूरी घटना को चैलेंज के रूप में लिया.
छह माह तक हुई लगातार छापेमारी : छह माह तक दिन-रात मेहनत कर पुलिस ने इस कांड के कुख्यात अपराधी हसन चिकना समेत गिरोह के 14 अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से साढ़े तीन करोड़ के चोरी के जेवरात व 35 लाख रुपये नकद बरामद कर कोर्ट के हवाले कर दिया. जेवरात बरामद होने के बाद उसकी पहचान के लिए थाना में जेवरात की प्रदर्शनी लगाकर पहचान परेड करायी गयी.
पहचान परेड में 10 से 20 लाख रुपये मूल्य का जेवरात गंवाने वाले लोगों में कुछ पीड़ितों को हजारों रुपये मूल्य का दो-चार जेवरात पहचान करने में ही सफलता मिली. कई जेवरात ऐसे हैं जिनकी पहचान एक साथ कई लोगों ने की है लेकिन अधिकतर लोगों के पास अपना दावा प्रस्तुत करने के लिये कागजात या साक्ष्य नहीं है. अपने जीवन की गाढ़ी कमाई लुटा चुके बैंक लॉकर कांड पीड़ित अब न्याय के लिये न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे है. सभी की निगाह अब न्यायालय पर टिकी है.
केस स्टडी एक
बिहार के जिला गया निवासी ज्योति नंदन सहाय वर्ष 2011 में बीएसएल से सेवानिवृत होकर अपने पैतृक गांव गया चले गये. श्री सहाय ने बताया : पुस्तैनी जेवरात के साथ पुत्री के शादी में दिया छह लाख का जेवरात भी बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा था. कुल 20 लाख का जेवर लॉकर में था. वर्ष 2011 में पुत्री की शादी बोकारो से हुई थी. शादी के बाद पुत्री अपने पति के साथ बेंगलुरु चली गयी. इस दौरान पुत्री ने अपना सारा गहना बैंक लॉकर में रखने के लिये दिया था. बैंक द्वारा घटना की सूचना भी नहीं दी गयी.
तीन दिन बाद अखबार से घटना की सूचना मिली. जेवरात चोरी की सूचना मिलने पर चिंता के कारण पत्नी को लकवा मार दिया. वह बेड पर है. पहचान परेड के दौरान थाना आया था. दो-चार गहनाें की पहचान की, लेकिन उसपर अन्य लोग भी दावा कर रहे है. अब न्यायालय के फैसले का इंतजार है.
केस स्टडी तीन
बारी को-ऑपरेटिव कॉलोनी निवासी यदुवंशी विश्वकर्मा बीएसएल के सेवानिवृत कर्मचारी है. बैंक लॉकर में लगभग 12 लाख रुपये मूल्य का जेवरात सुरक्षित रखा था. जेवरात पहचान परेड में शामिल होकर कुछ गहना की पहचान भी की, लेकिन सभी का कागज नहीं है. इनका कहना है कि मामला अभी कोर्ट में लंबित है. बरामद गहना देने के संबंध में न्यायालय का जो आदेश आयेगा. उसका इंतजार कर रहा हूं.
एसपी ने कहा
हसन चिकना के न्यायिक हिरासत में जाने के 60 दिनों के अंदर पुलिस कोर्ट में आरोप पत्र दायर कर मामले का स्पीडी ट्रायल करायेगी. ट्रायल शुरू होने के बाद बैंक लॉकर पीड़ित केस के आइओ के माध्यम से अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत कर बरामद जेवरात पर अपना दावा कर सकते है. न्यायालय के फैसले के बाद ही जेवरात देने या अन्य कार्रवाई हो सकती है.
कार्तिक एस, एसपी, बोकारो
अधिवक्ता बोले
बरामद जेवरात से संबंधित कागजात या साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत करने के बाद ही गहना संबंधित लॉकरधारी को रिलीज करने का आदेश कोर्ट दे सकता है. जेवरात से संबंधित कागजात नहीं होने पर उसे रिलीज नहीं किया जा सकता है. जेवरात सरकारी लॉकर में जमा रहेंगे. बैंक लॉकर कांड से पीड़ित सभी लोग एक साथ मिलकर अगर उसकी नीलामी कराकर नकद राशि समान रूप से बांटने की बात पर सहमत होकर कोर्ट में आवेदन देते हैं, तो कोर्ट इस संबंध में विचार कर सकता है.
राकेश कुमार राय, अपर लोक अभियोजक सह वरीय अधिवक्ता, बोकारो कोर्ट.D
