इस्पात उपभोक्ता परिषद की बैठक में एमएसटीसी मेटल मंडी लांच बेंगलुरू में हुई बैठक

बोकारो : बेंगलुरु में इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता परिषद की बैठक शुक्रवार को हुई. अध्यक्षता केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने की. इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के सचिव बिनॉय कुमार ने भाग लिया. इसमें राज्य सरकार के अधिकारी व उद्योग के प्रतिनिधि भी उपस्थित […]

बोकारो : बेंगलुरु में इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता परिषद की बैठक शुक्रवार को हुई. अध्यक्षता केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने की. इसमें मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के सचिव बिनॉय कुमार ने भाग लिया. इसमें राज्य सरकार के अधिकारी व उद्योग के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे. मंत्री श्री सिंह ने कहा : स्टील मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम एमएसटीसी के मोबाइल ऐप एम-3 (एमएसटीसी मेटल मंडी) लॉंच किया गया, जो खरीदार को विक्रेता के करीब लाने का काम करेगा. इसके साथ ही यह मुख्य रूप से छोटे खरीदारों की समस्याओं को दूर करेगा.

यह डिजिटल इंडिया के तहत भारत सरकार की योजना के रूप में शुरू की गयी है. बेंगलुरु कर्नाटक के साथ-साथ दक्षिणी क्षेत्र के पड़ोसी राज्यों के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. श्री सिंह ने वैश्विक इस्पात उद्योग में भारत की स्थिति को रेखांकित किया. बताया कि भारत में इस्पात की मांग में वृद्धि की अपार संभावना है. भारत में प्रति व्यक्ति इस्पात की खपत महज 68 किलोग्राम है, जो वैश्विक औसत 208 किलोग्राम प्रति व्यक्ति के मुकाबले एक तिहाई है.

इस मंच पर उत्पादक व उपभोक्ता दोनों एक साथ मिलकर इनोवेटिव व आउट ऑफ द बॉक्स आइडियाज के साथ इस्पात उद्योग को आगे ले जाने के लिए काम करते हैं. इस्पात की मांग, आपूर्ति, उत्पाद नवाचारों व लॉजिस्टिक्स जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है. लॉजिस्टिक्स एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है. उपभोक्ता परिषद को नीति निर्माताओं का जल्द ध्यान आकर्षित करने के लिए लॉजिस्टिक्स का संभावित रोडमैप तैयार करना होगा.

देश में प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास योजना व रक्षा की जरूरतों महत्वपूर्ण पहल के कारण मूल्यवर्धित व परिष्कृत ग्रेड स्टील की मांग बढ़ने की उम्मीद है. अनुसंधान व विकास, इनोवेशन की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्पात मंत्रालय ने स्टील रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी मिशन ऑफ इंडिया की स्थापना की है. मेक इन इंडिया व प्रधान मंत्री आवास योजना (2022 तक सभी के लिए आवास) जैसी पहलों से देश भर में स्टील की मांग बढने की उम्मीद है.
किसी सरकारी खरीद में परियोजना की लाइफ सायकल कॉस्ट को एक निर्धारक बनाने के लिए सरकार ने नीतिगत बदलाव जैसे सामान्य वित्तीय नियमों (जीएफआर) में संशोधन किया है. राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 की अधिसूचना में 2030-31 तक इस्पात उत्पादन क्षमता 3000 लाख टन प्रति वर्ष हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही सरकारी खरीद में घरेलू रूप से उत्पादित लौह व इस्पात उत्पादों को प्राथमिकता देने की अभूतपूर्व नीति लागू की गई है.

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