पूर्व मंत्री समरेश सिंह को मिली जमानत, अभी रहेंगे जेल में
धनबाद : नाजायज मजमा बनाकर निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर पुलिस पर पथराव करने व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के एक मामले में मंगलवार को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार चौधरी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए जेल में बंद समरेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. हालांकि वह अभी […]
धनबाद : नाजायज मजमा बनाकर निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर पुलिस पर पथराव करने व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के एक मामले में मंगलवार को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार चौधरी की अदालत ने फैसला सुनाते हुए जेल में बंद समरेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया. हालांकि वह अभी जेल से नहीं निकल पायेंगे, क्योंकि उनपर कई मामले पहले से चल रहे हैं. बचाव पक्ष के अधिवक्ता राधेश्याम गोस्वामी भी अदालत में मौजूद थे.
विदित हो कि 19 दिसंबर 97 को समरेश सिंह व उनके समर्थकों पर बोकारो इस्पात नगर जनाक्रोश रैली के समय नाजायज मजमा बना कर अवैध हथियारों से लैस होकर धनबाद-गोविन्दपुर रोड से भुइफोड़ की ओर बढ़े. जब पुलिस ने उन्हें मना किया तो उत्तेजित होकर बोला कि हर हाल में धनबाद केमिकल में घुसना है.
आंदोलनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया जिसमें डीएसपी व बीडीओ और कई पुलिसकर्मी घायल हो गये थे. घटना के बाद तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी महर्षि राम ने गोविंदपुर थाना में कांड संख्या 212/97 दर्ज कराया था. पीडीजे ने इस मामले में 29 मई 17 को 14 लोगों को रिहा कर दिया था.
समरेश सिंह को तीन मामलों में मिली जमानत
सरकारी काम में बाधा पहुंचाने व आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के तीनों विभिन्न मामलों में आरोपित जेल में बंद समरेश सिंह की ओर से दायर जमानत अर्जी पर सुनवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी व न्यायिक दंडाधिकारी अर्पित श्रीवास्तव की अदालत में हुई. अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राधेश्याम गोस्वामी ने बहस की अदालत ने उभय पक्षों की दलील सुनने के बाद तीनों मामले में जमानत दे दी. 13 मार्च 13 को समरेश सिंह के नेतृत्व में डीवीसी के कैजुअल मजदूरों की मांग को लेकर निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर प्रशासनिक भवन (डीवीसी) में ताला जड़ कर सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप है. जबकि अन्य दो मामले में 5 अगस्त 99 व 9 अगस्त 99 की है. इसमें धनबाद परिसदन के दीवार पर नारा लिखने का आरोप है. धनबाद के तत्कालीन बीडीओ सलीम अंसारी व तत्कालीन सीओ धनबाद ने धनबाद थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
झामुमो के फर्जी सिंबल मामले में फैसला आज
झारखंड मुक्ति मोर्चा का फर्जी सिंबल लेकर नामांकन दाखिल करने के मामले में सुनवाई मंगलवार को न्यायिक दंडाधिकारी अर्पित श्रीवास्तव की अदालत में हुई. अदालत में फैसले की तिथि तीन जनवरी 18 मुकर्रर कर दी. 12वीं लोकसभा चुनाव के दौरान समरेश सिंह ने झामुमो का फर्जी सिंबल लेकर नामाकंन पत्र दाखिल किया था. 29 जनवरी 98 को जब नामांकन पत्रों की जांच की गयी थी तो जब निर्वाचन अधिकारी ने इस संदर्भ में झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन से जानकारी ली तब उन्होंने पार्टी का सिंबल समरेश सिंह को देने की बात को नकार दिया था. उप समाहर्ता महर्षि राम ने तत्संबंधी केस दर्ज किया था.