झारखंड में स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट, जिलों में बढ़ाई गई निगरानी, अस्पतालों को तैयार रहने का निर्देश

झारखंड में स्वाइन फ्लू और मौसमी फ्लू के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों को मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक न लेने की अपील की गई है.

विपिन कुमार सिंह की रिपोर्ट

Swine Flu: देश के कई राज्यों में इंफ्ल्यूएन्जा ए एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और एच3एन2 सीजनल इंफ्ल्यूएन्जा के बढ़ते मामलों को देखते हुए झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक ने सभी सिविल सर्जन और जिला सर्विलेंस पदाधिकारियों को संभावित मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और लगातार निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

भारत सरकार के अपर सचिव डॉ राकेश गुप्ता ने 22 सितंबर को सात बिंदुओं वाली एडवाइजरी झारखंड सरकार को भेजी थी. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिलों में निगरानी और स्क्रीनिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. हालांकि, एडवाइजरी के अनुसार फिलहाल झारखंड में इंफ्ल्यूएन्जा संक्रमण के बड़े पैमाने पर मामले सामने नहीं आए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों के साथ ऑनलाइन बैठक कर अस्पतालों में बेड, दवाओं, जांच और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है.

इन राज्यों में बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के पत्र के अनुसार दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में इंफ्ल्यूएन्जा ए एच1एन1 के मामले बढ़े हैं. इसे देखते हुए झारखंड में भी सर्विलेंस सिस्टम को मजबूत करने और संभावित मरीजों की समय पर पहचान करने का निर्देश दिया गया है.

ओपीडी में होगी आईएलआई और एसएआरआई की स्क्रीनिंग

जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेजों की ओपीडी में आईएलआई और एसएआरआई मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी. सर्दी, खांसी, बुखार, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, उल्टी, सुस्ती, डायरिया और ठंड लगने जैसे लक्षणों वाले मरीजों पर विशेष नजर रखी जाएगी. सांस लेने में परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों को एसएआरआई श्रेणी में निगरानी में रखा जाएगा. डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों को मास्क लगाने का निर्देश दिया गया है.

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रिम्स और एमजीएम में जांच की सुविधा

इंफ्ल्यूएन्जा ए एच1एन1 और एच3एन2 की प्रयोगशाला जांच की सुविधा रिम्स, रांची और एमजीएम, जमशेदपुर में उपलब्ध है. जिलों को मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों के साथ समन्वय कर संदिग्ध मरीजों की जांच कराने को कहा गया है.

अस्पतालों में तैयार रखने होंगे आइसोलेशन बेड

मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में संक्रमित मरीजों के लिए कम से कम एक बेड का पृथक आइसोलेशन वार्ड चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है. अस्पतालों में पीपीई किट, एन-95 और ट्रिपल लेयर मास्क, वीटीएम किट, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन उपकरण और वेंटिलेटर उपलब्ध रखने को कहा गया है.

रोजाना पोर्टल पर दर्ज करनी होगी रिपोर्ट

जिला सर्विलेंस इकाइयां आईएलआई और एसएआरआई के मामलों के बढ़ते ट्रेंड पर नजर रखेंगी. इंफ्ल्यूएन्जा जांच की दैनिक रिपोर्ट आईडीएसपी-आईएचआईपी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को नियमित निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा है.

भीड़ से दूरी और मास्क जरूरी

संभावित मरीजों को मास्क लगाने और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है. खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढंकने, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने और हाथों की स्वच्छता बनाए रखने को कहा गया है. आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचने तथा सार्वजनिक स्थानों पर नहीं थूकने की सलाह दी गई है. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं लेने का भी निर्देश दिया गया है.

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बुजुर्ग और बच्चों को अधिक खतरा

बुजुर्गों, पांच वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों में इंफ्ल्यूएन्जा संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक हो सकता है. स्वास्थ्य विभाग ने सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों के माध्यम से आम लोगों को बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने का निर्देश दिया है.

इंफ्ल्यूएन्जा के प्रमुख लक्षण

  • बुखार के साथ खांसी, गले में खराश और नाक बहना या जुकाम.
  • शरीर में दर्द, सिरदर्द और ठंड लगना.
  • डायरिया, उल्टी और सुस्ती.

संक्रमण से बचाव के उपाय

  • छींकते या खांसते समय नाक और मुंह को रुमाल या कपड़े से ढकें.
  • साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं.
  • आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचें.
  • बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर सार्वजनिक जगहों से दूर रहें.
  • लक्षण होने पर डॉक्टर से संपर्क करें और उनकी सलाह के अनुसार ही दवाएं लें.
  • पूरी तरह ठीक होने तक डॉक्टर की सलाह के अनुसार घर पर रहें.
  • बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों का विशेष ध्यान रखें.

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क्या करें और क्या न करें

क्या करें

  • मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें.
  • खांसते और छींकते समय मुंह और नाक ढकें.
  • ताजा भोजन करें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं.
  • आंख और नाक को छूने से बचें.
  • बुखार या बदन दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल लें.

क्या न करें

  • सार्वजनिक जगहों पर न थूकें.
  • संक्रमित या बीमार व्यक्ति के साथ बैठकर भोजन करने से बचें.
  • हाथ मिलाने और अनावश्यक शारीरिक संपर्क से बचें.
  • डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लें.


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लेखक के बारे में

By अर्चना कुजूर

अर्चना कुजूर एक डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जो वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कार्यरत हैं. वह झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ राज्य की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक, प्रशासनिक और जनसरोकार से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं. अर्चना ने वर्ष 2016 में क्राफ्ट फिल्म स्कूल, रोहिणी (नई दिल्ली) से टीवी जर्नलिज्म एंड न्यूज रीडिंग में एक वर्षीय डिप्लोमा किया. इसके बाद उन्होंने नोएडा स्थित नेशनल वॉयस न्यूज और इंडिया वॉयस न्यूज चैनल (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) में इंटर्नशिप करने के साथ-साथ व्यावहारिक पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया.

झारखंड लौटने के बाद उन्होंने कशिश न्यूज चैनल में लगभग डेढ़ वर्ष तक आउटपुट विभाग में कॉपी राइटर के रूप में कार्य किया. इसके बाद रांची एक्सप्रेस में एजुकेशन बीट पर रिपोर्टिंग की और प्रिंट पत्रकारिता का अनुभव हासिल किया. वर्ष 2022 से उन्होंने न्यूज11 भारत और नक्षत्र न्यूज चैनल में लगभग दो-दो वर्षों तक डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए राज्य की राजनीति, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, योजनाओं और समसामयिक विषयों पर हजारों समाचार और विशेष लेख लिखें.

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