श्रद्धा मर्डर केस की नहीं होगी CBI जांच, याचिका खारिज, आफताब ने कोर्ट में कहा-वह बस हीट ऑफ मोमेंट था

आफताब पूनावाला को अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा की हत्या करने और उसके शव के 35 टुकड़े करके जंगल में फेंकने के आरोप में 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया है.

Shraddha murder case : श्रद्धा मर्डर केस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से संबंधित याचिका को आज दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हमें एक भी ऐसा कारण नहीं दिख रहा जिसके आधार पर इस याचिका पर सुनवाई की जाये, इसलिए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गयी थी जिसमें श्रद्धा मर्डर केस की जांच पुलिस के हाथों से लेकर सीबीआई को सौंपे जाने की अपील की गयी थी.

पाॅलीग्राफ टेस्ट की अनुमति दी

आज श्रद्धा मर्डर केस में आरोपी आफताब की रिमांड दिल्ली कोर्ट ने चार दिनों के लिए बढ़ा दी है. साथ ही कोर्ट ने आफताब की पाॅलीग्राफ टेस्ट की अनुमति भी दे दी है. आफताब पूनावाला को अपनी लिव इन पार्टनर श्रद्धा की हत्या करने और उसके शव के 35 टुकड़े करके जंगल में फेंकने के आरोप में 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया है.

तालाब में फेंके शव के टुकड़े

आफताब को मंगलवार की सुबह साकेत कोर्ट में पेश किया गया था. पूनावाला के वकील ने बताया कि उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उस तालाब की खोज शुरू की है जहां उसने शव के टुकड़े फेंके थे. वकील ने जानकारी दी है कि उसने उस तालाब का एक स्केच दिया है जहां उसने श्रद्धा के शरीक के टुकड़ों को फेंका है.

बस हीट आॅफ मोमेंट था

आफताब ने कोर्ट में कहा कि दिल्ली उसके लिए नयी जगह है, इसलिए वह जगह को पहचान नहीं पायेगा. वह पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहा है, ताकि जांच सही से हो सके. उसने कहा कि जो कुछ हुआ वह बस हीट आॅफ मोमेंट था, जानबूझकर किया गया कुछ भी इसमें नहीं था.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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