केंद्र सरकार ने बुधवार (9 सितंबर) को रेलवे की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं पर करीब 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे. काम पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में होगा. इससे इन राज्यों में रेल नेटवर्क मजबूत होगा और ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने की उम्मीद है.
इन परियोजनाओं को 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इनके तहत रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर नई रेल लाइनें जुड़ेंगी. इससे ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी, व्यस्त रेल मार्गों पर भीड़ कम होगी और ट्रेनों की आवाजाही ज्यादा सुचारू होगी. साथ ही, यात्रियों को बेहतर और भरोसेमंद रेल सेवा मिलने की उम्मीद है.
तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी
सरकार ने रेलवे की तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागडेही) के बीच चौथी रेल लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड के बीच चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड के बीच तीसरी रेल लाइन बनाई जाएगी. इन लाइनों के बनने से ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और व्यस्त रूट पर जाम कम होने की उम्मीद है.
करीब 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी : अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन रेल परियोजनाओं से करीब 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इन गांवों में लगभग 56 लाख लोग रहते हैं. नई रेल लाइनों से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक मंदिर, अचानकमार टाइगर रिजर्व और रतनपुर के महामाया मंदिर जैसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी.
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इन रेल परियोजनाओं से कोयला, सीमेंट, लोहा और स्टील जैसी जरूरी चीजों की ढुलाई आसान होगी. ये रूट मालगाड़ियों के लिए काफी अहम हैं. नई रेल लाइनों से रेलवे की क्षमता बढ़ेगी और हर साल करीब 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढोया जा सकेगा. इससे माल की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है.
परियोजनाओं से क्या होगा लाभ
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति योजना के तहत विकसित किया जाएगा. इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की व्यवस्था बेहतर होगी और ट्रांसपोर्ट का खर्च कम हो सकता है. ज्यादा माल रेल से भेजे जाने पर करीब 12 करोड़ लीटर तेल की बचत होने का अनुमान है. इससे करीब 62 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी कम होगा, जो लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है.
