Bihar Flood News : बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सरकार और बाढ़ राहत व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है. बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में आई बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि नदियों की बदहाल स्थिति, तटबंधों की अनदेखी और राहत कार्यों में कथित भ्रष्टाचार के कारण यह संकट और गंभीर हुआ है. उन्होंने इसे ‘मैन मेड डिजास्टर’ करार दिया.
बाढ़ पीड़ितों के पास पानी, चारा और दूध तक नहीं
पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई घरों में पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा और बच्चों के लिए दूध तक उपलब्ध नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि राहत व्यवस्था कई जगह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक टैंकर पानी पहुंचाकर प्रशासन यह मान लेता है कि जिम्मेदारी पूरी हो गई. उनके अनुसार, राहत शिविरों में यह भी सुनिश्चित नहीं किया जा रहा कि हर जरूरतमंद परिवार तक भोजन और जरूरी सामान पहुंचा या नहीं.
हर परिवार को 500 रुपये देने का दावा
पप्पू यादव ने कहा कि उनकी टीम की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जा रही है. उन्होंने दावा किया कि जरूरतमंद परिवारों को 500 रुपये दिए गए हैं.
उन्होंने चूड़ा, प्लास्टिक शीट, चावल और आटा जैसे राहत सामान उपलब्ध कराने की भी बात कही. सांसद ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत की जरूरत है और केवल सरकारी औपचारिकताओं से उनकी समस्या दूर नहीं होगी.
‘यह गॉड डिजास्टर नहीं, मैन मेड डिजास्टर है’
पप्पू यादव ने बाढ़ की स्थिति को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे केवल प्राकृतिक आपदा बताकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि नदियों में गाद बढ़ने, तटबंधों की मरम्मत में लापरवाही और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर होने वाले कामों में कथित अनियमितता के कारण स्थिति बिगड़ती है.
उन्होंने कहा कि बाढ़ से पहले पूरे साल तटबंधों और नदी तंत्र की निगरानी एवं मजबूती का काम होना चाहिए, लेकिन कथित तौर पर बाढ़ आने के बाद ही फ्लड फाइटिंग के नाम पर सक्रियता दिखाई जाती है.
फरक्का और नदियों के प्रबंधन पर उठाए सवाल
पप्पू यादव ने बिहार में बाढ़ की समस्या को लेकर फरक्का समेत नदियों के प्रबंधन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सोन, गंडक, पुनपुन और गंगा समेत कई नदियों में जलस्तर बढ़ने से हालात गंभीर हुए हैं.
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से बिहार में बाढ़ की स्थायी समस्या का समाधान तलाशने की मांग की. उनका कहना था कि हर साल बाढ़ आने के बाद राहत बांटने के बजाय नदियों और तटबंधों के स्थायी प्रबंधन पर काम होना चाहिए.
बाढ़ राहत के नाम पर भ्रष्टाचार का लगाया आरोप
सांसद ने बाढ़ राहत और फ्लड फाइटिंग के काम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि राहत सामग्री और तटबंधों के काम के नाम पर बड़े स्तर पर राशि खर्च होती है, लेकिन उसका पूरा लाभ बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंचता.
उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ को कुछ लोगों के लिए कमाई का अवसर बना दिया गया है. हालांकि, उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
कम्युनिटी किचन की व्यवस्था पर भी सवाल
पप्पू यादव ने कम्युनिटी किचन को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कई जगह खाना सीमित समय में दिया जाता है और यह सुनिश्चित नहीं होता कि सभी बाढ़ पीड़ितों को भोजन मिल पाया या नहीं.
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी, बच्चों के लिए दूध, दवाएं और पशुओं के लिए चारा नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाए.
बिहार के कई हिस्सों में गंभीर हालात का दावा
पप्पू यादव ने कहा कि इस बार बाढ़ का असर केवल सीमित इलाकों तक नहीं है, बल्कि कई ऐसे क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं जो पहले अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे. उन्होंने जहानाबाद, राघोपुर, हाजीपुर, भागलपुर और उत्तर बिहार के कई इलाकों की स्थिति का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि सरकार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक योजना पर काम करना चाहिए, ताकि हर साल लाखों लोगों को विस्थापन और फसल नुकसान का सामना न करना पड़े.
सरकार पर साधा निशाना, कहा- गरीबों की सुध लेने वाला कोई नहीं
पप्पू यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बाढ़ में गरीब परिवारों का घर, रोजगार और फसल सब प्रभावित हो जाते हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिलती. उन्होंने सरकार से बाढ़ प्रभावित लोगों के नुकसान का आकलन कर तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग की.
उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को केवल राहत सामग्री बांटने के बजाय उनके पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है.
बिहार में बाढ़ का पानी कई इलाकों में धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन गंगा समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है. ऐसे में प्रशासन के सामने राहत, बचाव और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है.