नटलीला-2016 में माउंटेन मैन दशरथ मांझी की गाथा की हुई जीवंत प्रस्तुति
नटलीला-2016 के दूसरे दिन प्रयास रंग मंडल, पटना की प्रस्तुति
हाजीपुर : माउंटेन मैन दशरथ मांझी की कथा गाथा की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों और प्रेक्षकों को झकझोर दिया. स्थानीय आम्रपाली नगर भवन में आयोजित चार दिवसीय नाट्य समारोह, नटलीला-2016 के दूसरे दिन सोमवार को नाटक दशरथ मांझी का मंचन हुआ. पटना की संस्था प्रयास रंग मंडल की ओर से रंगकर्मी मिथिलेश सिंह के लेखन और निर्देशन में यह नाटक प्रस्तुत किया गया.
नाट्योत्सव की दूसरी संध्या के मुख्य अतिथि राज्य के मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री अवधेश कुमार सिंह ने नाटक को समाज और जीवन का दर्पण बताते हुए कहा कि नाटक साहित्य की सबसे प्रभावी विधा है, क्योंकि इससे दर्शक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ते हैं. उन्होंने एक सुंदर और संवेदनशील समाज की रचना के लिए नाट्य कर्म को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई. इस अवसर पर शिक्षाविद नितिन, वैशाली चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अनिल चन्द्र कुशवाहा एवं समाजसेवी किसलय किशोर उपस्थित थे. कहते हैं कि पानी है तो जिंदगानी है. नाटक दशरथ मांझी की कथानक के केंद्र में भी पानी के लिए इनसान का संघर्ष ही है.
एक ऐसा व्यक्ति, जो पत्नी को चोट लग जाने के कारण पहाड़ काटने का निर्णय लेता है, बेशक सनकी ही रहा होगा. माउंटेन मैन दशरथ मांझी के जीवन की सच्ची कहानी पर आधारित इस नाटक को सुंदर और लयबद्ध बनाने के लिए सत्य के उपर कल्पनाओं की चादर लपेटी गयी है. निर्देशक का कहना था कि नाटक को मंच पर जीवंत करने में देश के नामचीन रंग निर्देशक संजय उपाध्याय के संगीत और प्रसिद्ध चित्रकार प्रो. श्याम शर्मा की मंचीय कल्पनाशीलता का बहुत बड़ा योगदान रहा है.
नाटक में दशरथ मांझी की भूमिका उदय शर्मा, फगुनिया की भूमिका रजनी शरण, मंगरू मांझी की भूमिका दीपक आनंद, भुना मांझी व चोर की भूमिका सदानंद कुमार पासवान ने निभायी. सिद्धांत कुमार, कुमुद रंजन लेखू, बबली कुमारी, विनोद यादव आदि ने भी अभिनय किया़ नाटक देख लोग भावुक हो उठे.
