बिहार में शिक्षक भर्ती और प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य, NCTE ने किया साफ, इन शिक्षकों को मिली राहत

TET Update News: टीईटी को लेकर काफी लंबे समय से चल रहा कंफ्यूजन अब काफी हद तक साफ हो गया है. इसे लेकर एनसीटीई की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा गया. इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों की भर्ती और प्रमोशन के लिए टीईटी न्यूनतम और अनिवार्य योग्यता है और इसमें किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती है.

पटना से अनुराग प्रधान की रिपोर्ट
TET Update News:
शिक्षक भर्ती और प्रमोशन में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर चल रही कानूनी बहस के बीच राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा है. सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक विस्तृत हलफनामे में एनसीटीई ने स्पष्ट किया है कि स्कूल शिक्षकों की भर्ती और प्रमोशन के लिए टीईटी न्यूनतम और अनिवार्य योग्यता है और इसमें किसी प्रकार की छूट का प्रावधान नहीं है.

केंद्र सरकार भी नहीं दे सकती टीईटी से छूट

हलफनामे में 8 नवंबर 2010 को जारी केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अगर किसी राज्य में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी हो तो कुछ न्यूनतम शैक्षणिक योग्यताओं में सीमित अवधि के लिए छूट दी जा सकती है, लेकिन टीईटी पास करने की अनिवार्यता में कोई छूट नहीं दी जा सकती.

पुराने शिक्षकों की स्थिति भी स्पष्ट की

एनसीटीई ने कहा कि 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू की गयी न्यूनतम शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता का प्रभाव नहीं पड़ेगा. लेकिन 3 सितंबर 2001 के बाद और विशेष रूप से 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए नियुक्ति और प्रमोशन दोनों में टीईटी अनिवार्य रहेगा.

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एनसीटीई को कानून से मिली है योग्यता तय करने की शक्ति

हलफनामे में कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 और शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने का अधिकार एनसीटीई को प्राप्त है. इसी अधिकार के तहत साल 2010 और 2014 में जारी अधिसूचनाओं में क्लास 1 से 8 तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य किया गया.

भर्ती और प्रमोशन दोनों में जरूरी है टीईटी

एनसीटीई ने कोर्ट को बताया कि साल 2014 के विनियमों में केवल नियुक्ति ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के प्रमोशन के लिए भी टीईटी को न्यूनतम योग्यता के रूप में शामिल किया गया है. विनियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टीईटी की अनिवार्यता में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती.

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है टीईटी

हलफनामे में कहा गया है कि टीईटी लागू करने का उद्देश्य देशभर में शिक्षक गुणवत्ता के समान राष्ट्रीय मानक सुनिश्चित करना, शिक्षक शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देना और छात्रों को बेहतर शिक्षण उपलब्ध कराना है. इसलिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में टीईटी को अनिवार्य बनाए रखना शिक्षा व्यवस्था के हित में आवश्यक है.

साथ ही एनसीटीई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि शिक्षक भर्ती और प्रमोशन से जुड़े मामलों में परिषद की ओर से जारी अधिसूचनाओं और विनियमों को ही लागू माना जाए, क्योंकि इन्हें संसद तरफ से बनाए गए कानून के तहत जारी किया गया है.

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Published by: Preeti dayal

डिजिटल जर्नलिज्म में 3 साल का अनुभव. डिजिटल मीडिया से जुड़े टूल्स और टेकनिक को सीखने की लगन है. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं. बिहार की राजनीति और देश-दुनिया की घटनाओं में रुचि रखती हूं.
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