सुपौल : जिला परिषद की जमीन और परिसंपत्तियों को चिन्हित कर उनका बेहतर उपयोग करने की दिशा में प्रशासन ने पहल शुरू कर दी है. इसी कड़ी में उप विकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद इंद्रवीर कुमार ने निर्मली प्रखंड के कुनौली सहित विभिन्न क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया. इस दौरान जिला परिषद की भूमि, सड़क, बस स्टैंड और हाट-बाजार की जमीन का भौतिक सत्यापन किया गया.
अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में सड़क की जमीन का किया सत्यापन
डीडीसी ने अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और अमीन के साथ कुनौली के अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के आसपास जिला परिषद की सड़क की जमीन का जायजा लिया. निरीक्षण में पाया गया कि अभिलेखों में किशनपुर से कुनौली तक की सड़क जिला परिषद के नाम दर्ज है. हालांकि सड़क के अधिकांश हिस्से पर राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से कार्य कराया गया है. कुछ हिस्सा कोसी नदी के अंदर भी है, जबकि कई गांवों में अभी इन सड़कों पर काम किया जाना बाकी है.
सरायगढ़ में बस स्टैंड और हाट की जमीन भी देखी
इसके बाद सरायगढ़ में जिला परिषद के बस स्टैंड और हाट की जमीन का निरीक्षण किया गया. जांच के दौरान कुछ स्थानों पर अतिक्रमण की स्थिति सामने आयी, जबकि कुछ जगहों पर जिला परिषद की भूमि पर अन्य योजनाओं का संचालन किये जाने की जानकारी मिली. अधिकारियों ने जमीन के वास्तविक स्वरूप और अभिलेखों से मिलान की प्रक्रिया को गंभीरता से पूरा करने की बात कही.
दो दिनों में सत्यापन पूरा करने का निर्देश
निरीक्षण के दौरान डीडीसी ने अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी और अमीन को निर्देश दिया कि जिला परिषद की सभी सड़कों का सर्वे नक्शे के साथ मिलान करते हुए दो दिनों के अंदर सत्यापन पूरा किया जाए. साथ ही जिला परिषद की अन्य परिसंपत्तियों को भी सर्वे नक्शा और स्थल निरीक्षण के आधार पर सत्यापित करने का निर्देश दिया.
डीडीसी ने कहा कि जिला परिषद की भूमि पर समय रहते विकास कार्य नहीं होने से उसके अतिक्रमित होने की आशंका बनी रहती है. कई बार ऐसी जमीन का अन्य प्रयोजनों में भी इस्तेमाल होने लगता है. इसलिए जिला परिषद की सभी संपत्तियों को चिन्हित कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि चिन्हित जमीन पर जिला परिषद की आय बढ़ाने वाली योजनाओं का चयन किया जाना चाहिए. इसके तहत बस स्टैंड को व्यवस्थित और कार्यान्वित करना, हाट-बाजारों को आधुनिक रूप देना और जिला परिषद की जमीन पर आय सृजित करने वाली संरचनाओं का निर्माण जैसे कार्य किये जा सकते हैं. इससे एक ओर जिला परिषद की आय में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करायी जा सकेंगी.
