सुपौल, वीरपुर. एसएसबी 45वीं बटालियन मुख्यालय वीरपुर में कमांडेंट गौरव सिंह के मार्गदर्शन और नेतृत्व में नागरिक कल्याण कार्यक्रम के तहत 30 दिवसीय बेसिक कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुवार को किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के जीवंत ग्रामों में रहने वाले युवाओं के कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान में वृद्धि और उन्हें रोजगारपरक अवसरों से जोड़ना है.
युवाओं को कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक का दिया जाएगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सीमावर्ती क्षेत्र के चयनित युवाओं को कंप्यूटर के बुनियादी ज्ञान के साथ डिजिटल तकनीक, इंटरनेट और कंप्यूटर के व्यावहारिक उपयोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी. प्रशिक्षण आईटीआई वीरपुर के कुशल एवं अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया जाएगा.
नियमित उपस्थिति और लगन से प्रशिक्षण लेने की अपील
कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट गौरव सिंह ने प्रशिक्षकों और प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में कंप्यूटर और तकनीकी ज्ञान प्रत्येक युवा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. उन्होंने प्रशिक्षुओं को नियमित रूप से प्रशिक्षण में उपस्थित रहने और पूरे मनोयोग व लगन के साथ सीखने के लिए प्रेरित किया. साथ ही प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान का व्यावहारिक जीवन में उपयोग करने की अपील की.
गुणवत्तापूर्ण और व्यवहारिक प्रशिक्षण पर जोर
कमांडेंट ने प्रशिक्षकों से प्रशिक्षणार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कंप्यूटर की जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर बदलते समय की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है.
युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए किया जाएगा तैयार
कमांडेंट गौरव सिंह ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम एवं आत्मनिर्भर बनाना, उनके कौशल का विकास करना तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों के लिए तैयार करना है. उन्होंने कहा कि कौशल विकास से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकते हैं.
सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में युवाओं की भूमिका अहम
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल आधारभूत सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वहां के युवाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है. इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके उज्ज्वल और आत्मनिर्भर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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