– हनुमान जयंती के अवसर पर जुटे उत्तर बिहार के संत – समाज जागरूकता और सनातन परंपराओं के संरक्षण का आह्वान सुपौल. चैत्र पूर्णिमा एवं हनुमान जयंती के पावन अवसर पर 02 अप्रैल से जिले के लौकहा ग्राम स्थित स्व अशरफी लाल दास की गौशाला में दो दिवसीय संत सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस सम्मेलन में उत्तर बिहार समेत विभिन्न क्षेत्रों से आए संतों ने भाग लेकर धर्म, समाज और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए. सम्मेलन के प्रथम दिवस की अध्यक्षता मार्गदर्शक मंडल के सदस्य एवं संत संयोजक चन्द्र भूषण दास ने की. उन्होंने अपने संबोधन में जिले के सभी प्रखंडों में संतों की टोली गठित करने का आह्वान किया, ताकि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया जा सके. वहीं पटना एवं गोहारी क्षेत्र के संत प्रमुख वीरेन्द्र विमल ने कहा कि संतों को कथा-प्रवचन के माध्यम से न केवल धार्मिक विषयों बल्कि समसामयिक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाना चाहिए. उन्होंने हिन्दू समाज को संगठित, सशक्त और जागरूक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा मतांतरण रोकने और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया. द्वितीय दिवस को कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय मार्गदर्शक मंच के सदस्य महंत बज्र मोहन दास ने की. उन्होंने मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए संतों से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. इस अवसर पर प्रांतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख रामशंकर कश्यप ने गौ-रक्षा के महत्व को रेखांकित किया. वहीं क्षेत्रीय संगठन मंत्री आनंद जी ने मठ-मंदिरों की सुरक्षा और संतों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की. सम्मेलन में मिथिलेश दास, किरण दास, राजकिशोरी शरण, श्री नारायण दास सहित अन्य संतों ने भी अपने विचार साझा किए. वक्ताओं ने कहा कि जिस प्रकार उत्तराखंड सरकार ने मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया है, उसी तरह अन्य राज्यों में भी इस दिशा में पहल होनी चाहिए. संतों से सनातन संस्कारों और परंपराओं के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर रहने का आह्वान किया गया. कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष रमण सिंह, चंद्रकांत झा, नीरज सिंह, रामशंकर चौधरी, मुकेश, आलोक, योगेंद्र जिज्ञासु, वासुदेव दास, जवाहर साह, रतन साह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
लौकहा गौशाला में दो दिवसीय संत सम्मेलन सम्पन्न, धर्म, संरक्षण व संगठन पर जोर
समाज जागरूकता और सनातन परंपराओं के संरक्षण का आह्वान
