सुपौल. जिले में 102 एंबुलेंस कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. एंबुलेंस सेवा ठप होने से सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों व गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है. जानकारी के अनुसार जिले में कुल 37 सरकारी एंबुलेंस संचालित होती हैं, लेकिन हड़ताल के बाद सभी सेवाएं बंद हो गई हैं. मजबूरी में प्रसव पीड़ित महिलाओं और अन्य मरीजों को निजी गाड़ियों या भाड़े की असुरक्षित गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनकी जान पर खतरा मंडराने लगा है. मरीजों की बढ़ती दिक्कतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत 05 निजी एंबुलेंस हायर की हैं. हालांकि सीमित संख्या के कारण यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से सदर अस्पताल तक मरीजों को लाने में परिजनों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. एंबुलेंस सेवा ठप होने से आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है. कई मरीज रेफर होने के बावजूद घंटों तक अस्पताल प्रांगण में एंबुलेंस का इंतजार करते रह जाते हैं. ऐसे में परिजन मजबूरी में महंगे किराए पर निजी एंबुलेंस का सहारा ले रहे हैं. मरीजों के परिजनों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को तुरंत पहल कर स्थिति को सामान्य बनाना चाहिए. साथ ही हड़ताल पर गए कर्मियों की जायज मांगों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि एंबुलेंस सेवा पुनः शुरू हो सके और आम लोगों को राहत मिल सके.
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