खुशखबरी: सुपौल से नेपाल सीमा तक फिर चलेगी ट्रेन

सुपौल जिले को मिलेगी नई पहचान

– ललितग्राम-वीरपुर नई रेल लाइन परियोजना को मिली मंजूरी सुपौल. जिले और नेपाल सीमा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है. ललितग्राम-वीरपुर (22 किलोमीटर) नई रेल लाइन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति दर्ज की गई है. पूर्व मध्य रेलवे (निर्माण संगठन) द्वारा जारी पत्र के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को रेलवे बोर्ड ने 09 सितंबर 2025 को मंजूरी प्रदान कर दी थी. जबकि इसके लागत अनुमान को 09 दिसंबर 2025 को स्वीकृति मिली. अब परियोजना की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 08 जनवरी 2026 तक टेंडर आमंत्रित किए गए थे. इस महत्वपूर्ण जानकारी की पुष्टि बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने की है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना अब केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. रेलवे के उच्च अधिकारियों की मुहर पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण उत्तर) आरएन रॉय द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ललितग्राम-वीरपुर नई रेल लाइन परियोजना के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियां मिल चुकी है. जिसके बाद निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू होगी. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी. सुपौल जिले को मिलेगी नई पहचान नई रेल लाइन के शुरू होने से सुपौल जिले को बेहतर और आधुनिक रेल कनेक्टिविटी मिलेगी. वर्तमान में इस क्षेत्र के लोगों को लंबी दूरी तय कर प्रमुख रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना पड़ता है. लेकिन ललितग्राम-वीरपुर रेल लाइन के चालू होने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से सुपौल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय लोगों को काम मिलेगा, वहीं रेल सेवा शुरू होने के बाद व्यापार और पर्यटन से जुड़े रोजगार भी बढ़ेंगे. नेपाल सीमा तक सुगम संपर्क वीरपुर नेपाल सीमा के नजदीक स्थित एक महत्वपूर्ण कस्बा है. इस नई रेल लाइन के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच आवागमन और व्यापारिक गतिविधियां और अधिक सशक्त होंगी. सीमावर्ती व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत होंगे. इसके अलावा, धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन उद्योग को भी लाभ मिलेगा. कोसी क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने की संभावना है. सुरक्षा के लिहाज से अहम है परियोजना यह रेल परियोजना केवल विकास की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र सामरिक दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से सुरक्षा बलों की आवाजाही तेज और सुगम होगी, जिससे आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी. रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत परिवहन व्यवस्था राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाती है. 1934 से पहले दौड़ती थी ट्रेन गौरतलब है कि ललितग्राम-वीरपुर रेलखंड पर 1934 से पहले ट्रेन की सीटी गूंजती थी, लेकिन 1934 में आए भीषण भूकंप ने इस क्षेत्र की रेल पटरियों को भारी नुकसान पहुंचाया. इसके बाद यह रेलखंड बंद हो गया. दशकों तक यह सपना अधूरा रह गया. अब करीब 92 वर्षों बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक मार्ग पर ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही है. स्थानीय लोग इसे सिर्फ एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि अपनी विरासत की वापसी मान रहे हैं. परियोजना से जुड़ी खबर सामने आते ही सुपौल और वीरपुर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है. ग्रामीणों, व्यापारियों और युवाओं को उम्मीद है कि इससे क्षेत्र का कायाकल्प होगा. बेहतर परिवहन सुविधा से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच आसान होगी. स्थानीय व्यापारी संघों का कहना है कि रेल लाइन शुरू होने से बाजारों में रौनक बढ़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी.

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