किशनपुर. सुपौल- सरायगढ़ रेलखंड के बीच अवस्थित थरबिटिया रेलवे स्टेशन अपने विभिन्न समस्याओं पर आंसू बहा रहा है. थरबिटिया स्टेशन कोसी इलाके का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है. इस स्टेशन पर करीब 50 गांव के लोग ट्रेन पकड़ने के लिए आते हैं. इस इलाके से प्रतिदिन दर्जनों लोग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा के लिए सफर करते हैं. बावजूद थरबिटिया रेलवे स्टेशन पर लंबी सफर का कोई भी ट्रेन का ठहराव नहीं होने से आम लोगों को भारी समस्याओं का सामना करता पड़ता है. लंबी दूरी की ट्रेन नहीं मिलने के कारण लोगों को 13 किलोमीटर सरायगढ़ या सुपौल स्टेशन पर जाना पड़ता है. रात्रि के समय भी सरायगढ़ या सुपौल में उतरने के बाद वैसे लोगों के लिए घर जाना मुश्किल हो जाता है. 1934 में ध्वस्त हो गया था स्टेशन थरबिटिया रेलवे स्टेशन अंग्रेज के जमाने से स्थापित है. उस समय में छोटी लाइन से ही लंबी दूरी कि ट्रेन यहां से चलती थी. 1934 के विनाशकारी भूकंप आने के बाद पुल, पुलिया, स्टेशन ध्वस्त होने से ट्रेन का आवागमण बंद हो गया था. 1960 ई में ललित बाबू के रेल मंत्री बनने के बाद पुनः ट्रेन को चालू करवाया गया. पेयजल की नहीं है समुचित व्यवस्था पीने के पानी के लिए पूरे स्टेशन परिसर में मात्र एक चापाकल है. कभी खराब हो जाता है तो कभी ठीक रहता है. गर्मी का मौसम आ रहा है. पेयजल का कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. स्टेशन के अंदर बैठने के लिए भी बेंच की समुचित व्यवस्था नहीं है. अगर 50 लोग स्टेशन पर आ गए तो सभी लोगों को खड़ा ही रहना पड़ेगा. प्लेटफॉर्म का निर्माण भी ठेकेदार द्वारा आधा अधूरा कार्य किया गया है. स्टेशन पर कहीं गड्ढा, कहीं पत्थर, कहीं रोड़ी ,जगह-जगह पर गड्ढा बना हुआ है. स्टेशन में ओवर ब्रिज नहीं है. ताकि लोग एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जा सके. स्टेशन पर पियक्कड़ों का जमावड़ा बना रहता है. स्टेशन पर सुरक्षा बल तैनाती नहीं है. 07 पॉइंट मेन की जगह यहां मात्र दो पॉइंट मेन द्वारा ही कार्य हो रहा है. पांच पद कई वर्षों से खाली है. ग्रामीणों ने स्टेशन पर यात्री सुविधा बढ़ाने सहित लंबी दूरी की ट्रेन परिचालन की मांग की है. इस बाबत स्टेशन अधीक्षक से संपर्क किया गया. उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारी बयान देने के लिए अधिकृत हैं.
थरबिटिया स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का है अभाव, लंबी दूरी की ट्रेन परिचालन की मांग
पेयजल की नहीं है समुचित व्यवस्था
