SUPAUL : किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ किसान संघर्ष समिति ने दिया धरना
अखिल भारतीय किसान महासभा से संबद्ध सुपौल जिला किसान संघर्ष समिति द्वारा सोमवार को जिला मुख्यालय में जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया.
सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट :
अखिल भारतीय किसान महासभा से संबद्ध सुपौल जिला किसान संघर्ष समिति द्वारा सोमवार को जिला मुख्यालय में जोरदार धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया. कार्यक्रम का नेतृत्व किसान संघर्ष समिति के संयोजक सह पिपरा विधानसभा के माले प्रत्याशी अनिल कुमार की अध्यक्षता में किया गया. धरना में किसानों, मजदूरों एवं भूमिहीनों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. अपने अध्यक्षीय संबोधन में कॉमरेड अनिल कुमार ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासनकाल में किसानों पर लगातार चौतरफा हमला किया गया है. उन्होंने कहा कि पहले किसान विरोधी तीन कृषि कानूनों को 750 किसानों की शहादत के बाद वापस लेना पड़ा, लेकिन अब अमेरिका के साथ की गई ट्रेड डील किसानों को और बदहाल करने वाली है. धरना को संबोधित करते हुए अच्छेलाल मेहता ने कहा कि किसानों को समय पर सस्ते दरों पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं हो रहा है. साथ ही फसलों की एमएसपी पर खरीद की कोई गारंटी नहीं दी जा रही. उन्होंने आरोप लगाया कि पैक्स के माध्यम से खरीदे गए धान और गेहूं का भुगतान भी किसानों को समय पर नहीं मिल रहा है तथा अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है. वहीं जय नारायण यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि गरीब और भूमिहीनों के घरों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है तथा छात्र-नौजवानों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि भाकपा माले पूरे बिहार में “गरीब बसाओ आंदोलन” चलाकर सरकार के खिलाफ व्यापक संघर्ष करेगी. धरना को संबोधित करते हुए ऐक्टू के जिला सचिव सह भाकपा माले नेता अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूरों की सुरक्षा के लिए बने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम कोड लागू करना चाहती है, जिससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे. उन्होंने कहा कि देशभर के मजदूर इसके खिलाफ आंदोलनरत हैं और संघर्ष के बल पर श्रम कोड को वापस करवाया जाएगा. धरना-प्रदर्शन को कॉमरेड सत्यनारायण मुखिया, दीन मोहम्मद, वीणा देवी, कामेश्वर यादव, मुकेश कुमार, कलाधर यादव, कार्तिक साह, संतोष कुमार, इलियास, श्रवण ऋषिदेव, फिरोज, मन्नान समेत सैकड़ों लोगों ने संबोधित किया और किसान-मजदूर हितों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया.