किशनपुर (सुपौल) से जीवछ प्रसाद यादव की रिपोर्ट:
सुपौल: रेलवे विभाग भले ही यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर सुविधाएं देने का दावा कर रहा हो. लेकिन सहरसा-सरायगढ़ रेलखंड स्थित थरबिट्टा रेलवे स्टेशन की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है. स्टेशन परिसर के अंदर और बाहर फैली गंदगी तथा कचरे के ढेर से यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रेलवे ग्राउंड में जमा कचरे से उठ रही तेज बदबू के कारण स्टेशन पर कुछ देर रुकना भी मुश्किल हो गया है.
स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन परिसर और उसके आसपास कई महीनों से नियमित सफाई नहीं हुई है. प्लेटफॉर्म के किनारे, रेलवे ग्राउंड और बाहर के हिस्सों में प्लास्टिक, सड़े-गले कचरे और अन्य अपशिष्ट का अंबार लगा हुआ है. हालात ऐसे हैं कि यात्रियों को स्टेशन से गुजरते समय नाक बंद करनी पड़ रही है. बारिश के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार रेल प्रशासन को शिकायत दी गई. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. स्टेशन पर न तो नियमित कूड़ा उठाव की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त डस्टबिन लगाए गए हैं. ऐसे में यात्री और स्थानीय लोग गंदगी के बीच ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर हैं.
यात्रियों का कहना है कि रेलवे स्टेशन किसी भी क्षेत्र का प्रवेश द्वार माना जाता है. लेकिन थरबिट्टा स्टेशन की बदहाल स्थिति यात्रियों के सामने गलत तस्वीर पेश कर रही है. लोगों ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों को आदर्श और स्वच्छ बनाने की बात कही जाती है. लेकिन यहां हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं.
स्थानीय नागरिकों ने रेल प्रशासन से अविलंब कचरा हटाने, नियमित सफाई व्यवस्था बहाल करने और स्टेशन परिसर को स्वच्छ बनाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि जल्द सफाई नहीं कराई गई तो बीमारी फैलने की आशंका बढ़ सकती है.
इस संबंध में स्टेशन अधीक्षक राही जी ने बताया कि अतिक्रमण हटाने का कार्य चल रहा है, जिसके कारण कचरा जमा हो गया है. उन्होंने कहा कि “दो दिनों के अंदर स्टेशन परिसर से कचरा साफ करा दिया जाएगा और स्थिति सामान्य कर दी जाएगी.”
फिलहाल यात्रियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि रेल प्रशासन जल्द कार्रवाई कर स्टेशन को गंदगी और बदबू से निजात दिलाएगा.
