-ईरान-इजरायल युद्ध के बीच सुपौल में बदला बाजार का रुख सुपौल. मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक भी पहुंचने लगा है. अंतरराष्ट्रीय हालात और बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता के बीच लोगों की खरीदारी की आदतों में बदलाव देखने को मिल रहा है. जिले में भी इसका असर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है. खासकर सर्राफा बाजार में ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से आर्थिक संतुलन बनाए रखने, अनावश्यक खर्च से बचने और संयमित खरीदारी करने की अपील का असर जिले में भी देखने को मिल रहा है. स्थानीय स्वर्ण व्यवसायियों का कहना है कि लोग फिलहाल सोना खरीदने में सतर्कता बरत रहे हैं. सुपौल के स्वर्ण व्यवसायी आनंद अग्रवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सोने की खरीदारी में कमी आई है. उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव और बाजार में लगातार बढ़ते दामों के कारण लोग फिलहाल निवेश को लेकर सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं. ग्राहकों का रुझान जरूरत के अनुसार खरीदारी करने की ओर बढ़ा है. आनंद अग्रवाल ने कहा कि पहले जहां लोग शादी-विवाह या निवेश के उद्देश्य से खुलकर सोने की खरीदारी करते थे. वहीं अब ग्राहक कीमतों और भविष्य की परिस्थितियों को देखते हुए थोड़ा इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि आम लोगों में यह सोच बढ़ी है कि फिलहाल आर्थिक स्थिरता बनाए रखना ज्यादा जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा आत्मनिर्भरता, बचत और आर्थिक अनुशासन पर लगातार दिए जा रहे संदेशों का असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ रहा है. लोग अब जरूरत और प्राथमिकता के हिसाब से खर्च करने लगे हैं. इसका प्रभाव सर्राफा बाजार सहित अन्य व्यापारिक क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है. हालांकि कारोबारियों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है. जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे और बाजार स्थिर होगा, सोने की मांग फिर से बढ़ सकती है. वर्तमान समय में लोग निवेश के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं. सुपौल बाजार के व्यापारियों का कहना है कि वैश्विक युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है. पेट्रोल-डीजल, आयात-निर्यात और डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव सोने के दामों पर भी दिखाई देता है. ऐसे में ग्राहक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होता है तो सर्राफा बाजार में फिर से रौनक लौट सकती है. फिलहाल सुपौल सहित पूरे जिले में लोग आर्थिक फैसले काफी सोच-समझकर ले रहे हैं और यही बदलाव स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है.
सोना खरीदारी में आई कमी, पीएम की अपील का असर
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच सुपौल में बदला बाजार का रुख
