चौथे दिन भी नहीं हुआ सूर्यदेव का दर्शन, कोल्ड वेभ से लोगों की बढ़ी परेशानी

शहर की तुलना में गांवों की स्थिति और अधिक चिंताजनक है

सुपौल. लगातार चौथे दिन भी सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से जिले में जारी शीतलहर ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. शहर से लेकर गांव तक, अमीर हो या गरीब, हर कोई इस कड़ाके की ठंड से बेहाल नजर आ रहा है. सुबह होते ही कोहरे की मोटी चादर पूरे जिले को अपनी आगोश में ले लेती है. दृश्यता इतनी कम हो जाती है कि कुछ ही कदम दूर तक देख पाना मुश्किल हो जाता है. ठंडी हवाओं से कनकनी बढ़ गयी है. तापमान लगातार नीचे गिरता जा रहा है, जिससे खासकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो सकता है. रजाई व अलाव जीवन का बना सहारा इस भीषण ठंड में लोगों की जिंदगी रजाई, कंबल और अलाव के सहारे कट रही है. गांवों में सुबह-सुबह खेतों की ओर जाने वाले किसान अब देर से निकल रहे हैं. मजदूरों के हाथ-पैर सुन्न पड़ रहे हैं, जिससे दिहाड़ी मजदूरी पर भी असर पड़ा है. शहरों में दुकानदार अलाव जलाकर किसी तरह दुकानें खोल रहे हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या बेहद कम है. गरीब और बेसहारा लोगों की हालत सबसे ज्यादा खराब है. फुटपाथ पर रहने वाले लोग रातभर ठंड से लड़ते नजर आते हैं. कई जगहों पर लोग प्लास्टिक, लकड़ी और कचरे को जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि, इससे ठंड से राहत तो मिलती है, लेकिन धुएं के कारण सांस की परेशानी भी बढ़ रही है. बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर भीषण ठंड का सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है. सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या अस्पतालों में बढ़ने लगी है. डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन कक्षा 08 तक के सभी स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है, ताकि बच्चों को ठंड से बचाया जा सके. बाजारों में सन्नाटा, दिनचर्या अस्त-व्यस्त जहां आम दिनों में सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल रहती थी, वहीं अब देर सुबह तक सन्नाटा पसरा रहता है. लोग बेहद जरूरी होने पर ही घरों से निकल रहे हैं. ठंड के कारण सार्वजनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है. चाय की दुकानों पर जरूर थोड़ी रौनक देखने को मिलती है, जहां लोग गर्म चाय की चुस्की के साथ ठंड को कोसते नजर आते हैं. गांवों में हालात और भी बदतर शहर की तुलना में गांवों की स्थिति और अधिक चिंताजनक है. कई इलाकों में अब भी पक्के मकानों की कमी है. कच्चे घरों में रहने वाले लोग पूरी रात ठंड से जूझते हैं. लकड़ी और उपले जलाकर किसी तरह रात काटी जा रही है. सुबह होते ही लोग धूप निकलने की आस में दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठे रहते हैं, लेकिन आसमान में सिर्फ धुंध और कोहरा ही नजर आता है. हर किसी के मन में यही सवाल है आखिर कब बदलेगा मौसम? कब निकलेगा सूरज? लोग अब ठंड से ऊब चुके हैं. लगातार ठिठुरन भरे दिन और रात ने मानसिक रूप से भी लोगों को थका दिया है. बुजुर्ग कहते हैं कि “ऐसी ठंड सालों बाद देखी है,” तो युवा वर्ग इसे “हड्डियां कंपा देने वाली सर्दी” बता रहा है. कहते हैं मौसम वैज्ञानिक कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ देबन कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस है. न्यूनतम तापमान 9.5 डिग्री सेल्सियस है. वहीं 07 से 08 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल रही है. 04 जनवरी तक इसी तरह मौसम रहने की संभावना है.

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