त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भी शल्य प्रसव की सुविधा बहाल

सिविल सर्जन ने फीता काटकर शल्य प्रसव सुविधा का किया शुभारंभ

– सिविल सर्जन ने फीता काटकर शल्य प्रसव सुविधा का किया शुभारंभ – सेवा शुरू होने के कुछ ही घंटे बाद किया गया एक प्रसूता का सफल सी-सेक्शन – गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए नहीं तय करनी पड़ेगी लंबी दूरी सुपौल. जिले में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ व प्रभावी बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब सदर अस्पताल के साथ-साथ निर्मली व त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भी सी-सेक्शन (शल्य प्रसव) की सुविधा विधिवत रूप से शुरू कर दी गई है. इससे ना सिर्फ गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव का नया विकल्प मिला है, बल्कि उन प्रसूताओं को भी राहत मिलेगी जिन्हें गंभीर स्थिति में दूर-दराज जाकर ऑपरेशन कराना पड़ता था. निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल में 18 नवंबर से सी-सेक्शन के तहत प्रसव की सुविधा प्रारंभ की गई. इस दिन अस्पताल की टीम ने पहला सफल सी-सेक्शन कर एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिलाया. यह इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक शुरुआत थी, क्योंकि लंबे समय से यहां के लोगों को इस प्रकार की उन्नत प्रसव सुविधा का इंतजार था. स्थानीय महिलाओं और उनके परिजनों ने इस सुविधा को शुरू किए जाने पर खुशी व्यक्त की है. ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें अब ऑपरेशन कराना हो तो बड़े अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. निर्मली में सेवा शुरू होने के बाद गुरुवार को त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भी सी-सेक्शन प्रसव सुविधा की शुरुआत कर दी गई. सेवा शुरू होने के कुछ ही घंटे बाद यहां एक प्रसूता का सफल सी-सेक्शन किया गया. ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए जा रहे हैं. त्रिवेणीगंज क्षेत्र में भी इस सुविधा के शुरू होने को लेकर प्रसूताओं और उनके परिजनों में उत्साह देखा गया. गुरुवार को निर्मली और त्रिवेणीगंज दोनों जगह एक-एक सफल सी-सेक्शन ऑपरेशन किए गए. दोनों अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों की टीम ने मिलकर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया. दोनों प्रसूताओं व नवजात शिशुओं की हालत सामान्य है और उन्हें अस्पताल में विशेष निगरानी में रखा गया है. दोनों अस्पतालों में इस उपलब्धि को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने टीम वर्क का परिणाम बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में अब हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में बेहतर और त्वरित इलाज उपलब्ध हो सकेगा. नई सुविधा शुरू होने से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को तत्काल मिलेगा उपचार अब तक जिले के ग्रामीण इलाकों की गर्भवती महिलाओं को जटिल प्रसव की स्थिति में सी-सेक्शन के लिए सदर अस्पताल या फिर बाहर बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता था. कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से जटिलताएं बढ़ जाती थीं. नई सुविधा शुरू होने से हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को तत्काल उपचार मिलेगा. आकस्मिक परिस्थितियों में ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध रहेगी. समय की बचत होगी और मरीज को यात्रा की परेशानी नहीं होगी. जिले में पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. प्रसूताओं के लिए मुफ्त जांच, अल्ट्रासाउंड, टीकाकरण, पोषण कार्यक्रम, एसएनसीयू एवं न्यूबोर्न केयर यूनिट की सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं. अब सी-सेक्शन सुविधा शुरू होने से जिला स्वास्थ्य सेवा एक नए स्तर पर पहुंच गई है. सी-सेक्शन सुविधा शुरू होने से मां और शिशु की मृत्यु दर में आएगी कमी : सीएस सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने कहा कि अब जिले की अधिकांश गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी. सदर अस्पताल के अलावा अनुमंडलीय अस्पतालों में सी-सेक्शन सुविधा शुरू होने से मां और शिशु की मृत्यु दर में कमी आएगी. यह स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता रही है कि हर गर्भवती महिला को समय पर और गुणवत्तापूर्ण मातृत्व सेवाएं मिलें. सभी अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों से लैस करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं. कहा कि दोनों अस्पतालों में प्रशिक्षित गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, नर्सिंग स्टाफ तथा आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग जिले की हर प्रसूता को सुरक्षित मातृत्व का अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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