Supaul News: समाज में बढ़ती हिंसा और अपराध आज गंभीर चिंता का विषय बन गया है. अपराधमुक्त और संस्कारित समाज के निर्माण में नैतिक शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. वर्तमान समय में नैतिक शिक्षा की कमी भी अपराध बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है. ऐसे में युवा पीढ़ी को नैतिक मूल्यों, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से जोड़ना जरूरी है.
उक्त बातें माउंट आबू, राजस्थान से आए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोगी ब्रह्माकुमार भगवान भाई ने कहीं. वे मंगलवार को सिमराही के एक निजी विद्यालय में ‘अपराधमुक्त समाज के लिए नैतिक शिक्षा की आवश्यकता’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
कुसंगति और व्यसनों से युवाओं के भटकाव पर चिंता
भगवान भाई ने कहा कि कुसंगति, व्यसन, सिनेमा, मोबाइल और फैशन के बढ़ते प्रभाव के कारण आज की युवा पीढ़ी कई स्तरों पर भटकाव का सामना कर रही है. काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या और नफरत जैसे मनोविकारों के प्रभाव में व्यक्ति गलत दिशा में आगे बढ़ सकता है और इसका परिणाम अपराध के रूप में सामने आ सकता है.
उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा के माध्यम से इन विकारों पर संयम प्राप्त किया जा सकता है. नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिकता युवा पीढ़ी को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच, रचनात्मक चेतना और मानवीय मूल्यों का विकास होता है.
उन्होंने विद्यार्थियों से अपने व्यवहार और विचारों में सकारात्मक बदलाव लाने तथा जीवन में अच्छे संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया. उनका कहना था कि अपराधमुक्त समाज केवल कानून और व्यवस्था के प्रयासों से नहीं बन सकता, बल्कि इसके लिए व्यक्ति के विचार और व्यवहार में भी बदलाव जरूरी है.
भावी समाज के निर्माण में युवाओं की अहम भूमिका
भगवान भाई ने कहा कि देश को विकसित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. विकसित देशों की श्रेणी में पहुंचने की कल्पना के साथ समाज में बढ़ रहे अपराध और युवाओं के भटकाव पर भी गंभीरता से विचार करना होगा.
उन्होंने कहा कि वर्तमान का युवा ही भावी समाज का आधार है. यदि आने वाले समय में अपराधमुक्त और सशक्त समाज का निर्माण करना है तो आज की युवा पीढ़ी को नैतिक शिक्षा के माध्यम से संस्कारित, जिम्मेदार और सशक्त बनाना होगा.
उन्होंने कहा कि केवल भौतिक विकास से समाज का संपूर्ण विकास संभव नहीं है. सामाजिक और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है. व्यक्ति के चरित्र और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के बिना विकास की तस्वीर अधूरी रहेगी.
सद्गुणों के विकास से शिक्षा होगी सार्थक
भगवान भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा के माध्यम से समाज में फैली घृणा, नफरत, बैर, विरोध और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को कम किया जा सकता है. शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्ति को चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य है.
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को विकारों, व्यसन, नशे और विभिन्न बुराइयों से स्वयं को मुक्त करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए. जो ज्ञान व्यक्ति को अज्ञान रूपी अंधकार से प्रकाश की ओर और असत्य से सत्य की ओर ले जाए, वही सच्चा ज्ञान है.
उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति के व्यवहारिक जीवन में परोपकार, त्याग, उदारता, नम्रता और सहनशीलता जैसे सद्गुणों का विकास नहीं होता, तब तक शिक्षा को पूर्ण नहीं माना जा सकता. इन मूल्यों को जीवन में उतारकर ही व्यक्ति अपने साथ-साथ समाज के निर्माण में भी सकारात्मक योगदान दे सकता है.
Supaul News: ब्रह्माकुमारी संस्था की गतिविधियों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र के बीके किशोर भाई ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय और उसकी विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
कार्यक्रम में नैतिक शिक्षा, आध्यात्मिकता और युवाओं के चरित्र निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया.
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि स्वस्थ और अपराधमुक्त समाज के लिए केवल शिक्षा का प्रसार पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और अच्छे संस्कारों को भी जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है.
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