Supaul Chhatapur Camp: छातापुर (सुपौल). सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने और छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड कार्यालय तक दौड़ लगाने की परेशानी से ग्रामीणों को राहत देने के उद्देश्य से मंगलवार को छातापुर प्रखंड की तीन पंचायतों में द्वितीय चरण का सहयोग शिविर लगाया गया. लालगंज, लक्ष्मीपुर खूंटी और माधोपुर पंचायत में आयोजित शिविर में जिला से नामित अधिकारियों और प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं.
शिविर में अलग-अलग विभागों के स्टॉल लगाये गये थे. यहां ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर आवेदन दिया. प्रतिनियुक्त कर्मी प्राप्त आवेदनों को सहयोग पोर्टल पर अपलोड कर रहे थे. खास बात यह रही कि कई मामलों में ग्रामीणों को लंबे इंतजार के बजाय शिविर में ही राहत मिल गयी.
तीनों पंचायतों में कुल 41 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 25 आवेदनों का त्वरित निष्पादन कर दिया गया. इससे यह साफ हुआ कि पंचायत स्तर पर आयोजित इस तरह के शिविर ग्रामीणों के लिए सीधे अधिकारियों तक पहुंचने का एक आसान माध्यम बन रहे हैं.
लालगंज में डीसीएलआर ने संभाली कमान
लालगंज पंचायत भवन में आयोजित सहयोग शिविर की अध्यक्षता डीसीएलआर त्रिवेणीगंज संस्कार रंजन ने की. शिविर में बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.
विभिन्न विभागों के स्टॉल पर ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे. शिविर में कुल आठ आवेदन प्राप्त हुए. इन आवेदनों को सहयोग पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है और उनके निष्पादन की कार्रवाई की जा रही है.
ग्रामीणों के लिए इस प्रक्रिया का महत्व इसलिए भी है कि उन्हें अपनी समस्या लेकर अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर लगाने के बजाय पंचायत स्तर पर ही संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने का अवसर मिला.
लक्ष्मीपुर खूंटी में 21 में 20 आवेदनों का निष्पादन
लक्ष्मीपुर खूंटी पंचायत सरकार भवन में आयोजित शिविर की अध्यक्षता वरीय उपसमाहर्ता सुपौल पुष्पा कुमारी ने की. यहां सीओ रविराज कुमार और बीपीआरओ देश कुमार समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे.
शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 21 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 20 आवेदनों का त्वरित निष्पादन कर दिया गया.
एक ही दिन में प्राप्त अधिकांश आवेदनों के निष्पादन से ग्रामीणों को तत्काल राहत मिली. अधिकारियों ने लोगों की समस्याओं को सुनने के साथ संबंधित विभागों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ायी.
माधोपुर में 12 आवेदन, पांच का हुआ समाधान
माधोपुर पंचायत में भी सहयोग शिविर का आयोजन किया गया. यहां डीपीआरओ गयानंद यादव राजस्व अधिकारी के साथ शिविर का संचालन कर रहे थे.
शिविर में विभिन्न समस्याओं से जुड़े 12 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से पांच आवेदनों का त्वरित निष्पादन कर दिया गया, जबकि अन्य आवेदनों पर आवश्यक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है.
शिविर में विभागवार स्टॉल लगाये जाने के कारण ग्रामीणों को अपनी समस्या के लिए संबंधित कर्मियों और अधिकारियों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला.
आवेदन लेने के साथ पोर्टल पर भी हो रहा काम
सहयोग शिविर की खास व्यवस्था यह रही कि सिर्फ ग्रामीणों से आवेदन लेकर उन्हें छोड़ नहीं दिया गया. प्रतिनियुक्त कर्मी प्राप्त आवेदनों को सहयोग पोर्टल पर अपलोड कर रहे थे.
इससे शिकायतों और आवेदनों को संबंधित विभाग तक पहुंचाने तथा उनके निष्पादन की प्रक्रिया को दर्ज करने में मदद मिल रही है. अधिकारियों का जोर समस्याओं के त्वरित निष्पादन पर रहा.
हालांकि जिन आवेदनों का मौके पर समाधान नहीं हो सका, उनके लिए भी पोर्टल के माध्यम से आगे की कार्रवाई की जा रही है.
प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाने से मिलेगी राहत
बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि सहयोग शिविर का मुख्य उद्देश्य जनसमस्याओं और शिकायतों का त्वरित निष्पादन करना है. ग्रामीणों को किसी भी समस्या के समाधान के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़े, इसी उद्देश्य से पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित किये जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देश पर आयोजित सहयोग शिविर से आम लोगों को पंचायत स्तर पर ही अपनी समस्या अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है.
यह व्यवस्था खासकर उन ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्हें किसी छोटे काम या शिकायत के लिए प्रखंड कार्यालय तक आने-जाने में समय और पैसा खर्च करना पड़ता है.
Supaul Chhatapur Camp: दूसरे पंचायतों में भी लगेगा सहयोग शिविर
छातापुर प्रखंड में सहयोग शिविर का आयोजन चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है. मंगलवार को तीन पंचायतों में द्वितीय चरण का शिविर लगाया गया.
बीडीओ के अनुसार जिला से प्राप्त रोस्टर के मुताबिक आने वाले दिनों में प्रखंड की अन्य पंचायतों में भी सहयोग शिविर आयोजित किये जायेंगे. ऐसे में संबंधित पंचायतों के ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में शिविर की तारीख की जानकारी रखनी होगी, ताकि वे अपनी शिकायत या समस्या से संबंधित आवेदन सीधे शिविर में दे सकें.
पंचायत स्तर पर अधिकारियों की मौजूदगी और मौके पर आवेदनों के निष्पादन से ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद है. अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन आवेदनों का भी समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने की है, जिनका समाधान शिविर में तत्काल नहीं हो सका.
