सुपौल में अधूरे आंगनबाड़ी केंद्रों पर डीडीसी सख्त, 15 दिन में निर्माण पूरा कर बच्चों को सौंपने का आदेश

सुपौल में अधूरे पड़े आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण पर प्रशासन सख्त हो गया है. उप विकास आयुक्त ने 15 दिनों के भीतर सभी अपूर्ण केंद्रों का निर्माण पूरा कर हस्तांतरण का आदेश दिया है. यह निर्णय ग्रामीण बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है.

Supaul Anganwadi Centre: सुपौल में गांवों में बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित माहौल तैयार करने के लिए बनाए जा रहे आंगनबाड़ी केंद्र अगर महीनों तक अधूरे पड़े रहें, तो इसका सीधा असर बच्चों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है. अब सुपौल में ऐसे अधूरे आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है.

पंचायत स्तर पर चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट समयसीमा दे दी है. सभी अपूर्ण आंगनबाड़ी केंद्र भवनों का निर्माण अगले 15 दिनों के भीतर पूरा कर उनका हस्तांतरण सुनिश्चित करना होगा.

डीडीसी ने साफ कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बन रही योजनाओं में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अब संबंधित अधिकारियों को सिर्फ कागजों पर प्रगति दिखाने के बजाय स्थल पर काम पूरा कराना होगा.

15 दिन की डेडलाइन, अधूरे केंद्रों पर अब होगी सीधी नजर

पंचायत स्तर की योजनाओं में तेजी लाने के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में आंगनबाड़ी केंद्र भवनों के निर्माण की प्रखंडवार स्थिति की जानकारी ली गई. इस दौरान कहां निर्माण पूरा हो चुका है, कहां काम अधूरा है और किन कारणों से योजनाओं की रफ्तार धीमी है, इसकी समीक्षा की गई.

समीक्षा के बाद डीडीसी ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों, पंचायत समिति और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि एक पक्ष यानी 15 दिनों के भीतर सभी अधूरे आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूरा कराया जाए.

निर्माण पूरा होने के बाद भवनों का हस्तांतरण भी सुनिश्चित करना होगा, ताकि तैयार भवन सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बनकर न रह जाएं, बल्कि बच्चों के उपयोग में आ सकें.

आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ भवन नहीं, बच्चों के लिए जरूरी जगह

ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ऐसे में भवन निर्माण में देरी का मतलब है कि बच्चों को लंबे समय तक बेहतर सुविधाओं से वंचित रहना पड़ सकता है.

डीडीसी ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य में तेजी लाने पर जोर दिया. उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए बनाए जा रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्रशासन अब यह भी चाहता है कि निर्माण कार्य केवल समय पर पूरा ही न हो, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप रहे.

पंचायत सरकार भवन और कन्या विवाह मंडप की भी हुई समीक्षा

समीक्षा बैठक में सिर्फ आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर चल रही दूसरी महत्वपूर्ण योजनाओं की भी स्थिति देखी गई.

पंचायत सरकार भवन, मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत स्तर से संचालित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई. डीडीसी ने संबंधित अधिकारियों से योजनाओं की मौजूदा स्थिति और निर्माण कार्य में आ रही परेशानियों की जानकारी ली.

उन्होंने ग्राम पंचायतों को पंचायत सरकार भवन और मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप के निर्माण कार्य में भी तेजी लाने का निर्देश दिया.

जहां काम धीमा, वहां जिम्मेदारी तय करने की तैयारी

बैठक में डीडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में किसी कारण से काम की गति धीमी है, वहां संबंधित स्तर पर जरूरी कार्रवाई की जाए.

इसके साथ ही अधिकारियों को नियमित निगरानी करने और स्थल पर जाकर निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति की जांच करने को कहा गया है. इसका मतलब है कि अब योजनाओं की समीक्षा सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर भी की जाएगी.

प्रशासन की कोशिश है कि निर्माण कार्य में आने वाली अड़चनों को समय रहते दूर किया जाए और योजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी हों.

समयसीमा के साथ गुणवत्ता पर भी जोर

सरकारी भवन बनाना ही पर्याप्त नहीं है. भवन ऐसा हो, जो लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी रहे. इसी वजह से डीडीसी ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया.

उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं में समयसीमा के साथ गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए. निर्माण में लापरवाही या अनावश्यक विलंब सामने आने पर संबंधित पदाधिकारी और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी.

इस सख्ती का असर उन योजनाओं पर पड़ सकता है, जिनका काम लंबे समय से किसी न किसी कारण से आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

Supaul Anganwadi Centre: गांवों तक समय पर पहुंचे विकास योजनाओं का लाभ

पंचायत स्तर पर बनने वाले सरकारी भवन ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं से सीधे जुड़े हैं. आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए जरूरी हैं, जबकि पंचायत सरकार भवन जैसी योजनाएं ग्रामीण प्रशासन को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने में मदद करती हैं.

प्रशासन का लक्ष्य है कि इन योजनाओं के निर्माण में देरी के कारण ग्रामीणों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े. तैयार भवन समय पर उपयोग में आएं और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचे.

अब अगले 15 दिन इस लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे. प्रशासन ने अधूरे आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को लेकर समयसीमा तय कर दी है. ऐसे में संबंधित अधिकारियों के सामने चुनौती सिर्फ काम पूरा कराने की नहीं, बल्कि निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण निर्माण और उसके बाद भवन का हस्तांतरण सुनिश्चित करने की भी है.

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लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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