Vidyarthi Sahayog Camp: सुपौल में अब विद्यार्थियों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी. हर महीने के चौथे मंगलवार को आयोजित होने वाला विद्यार्थी सहयोग शिविर सीधे उनकी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा. मंगलवार को प्रतापगंज के तीन शिक्षण संस्थानों में आयोजित शिविर में अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया और उन्हें बिना झिझक अपनी परेशानी सामने रखने के लिए प्रेरित किया.
सात निश्चय-3 के तहत ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थी सहयोग शिविर की शुरुआत की गयी है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सामने रखने का अवसर देना है, ताकि उनका समय पर समाधान कराया जा सके.
तीन संस्थानों में पहुंचकर अधिकारियों ने सुनी विद्यार्थियों की बात
मंगलवार को केजीबीवी सरस्वती विद्या निकेतन प्रतापगंज, राजकीय डिग्री कॉलेज प्रतापगंज और केजीबीवी उर्दू मध्य विद्यालय सूरजापुर में विद्यार्थी सहयोग शिविर लगाया गया.
तीनों शिविरों का निरीक्षण प्रखंड विकास पदाधिकारी अमरेश कुमार मिश्रा ने किया. केजीबीवी सरस्वती विद्या निकेतन में सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई सुपौल देवेश कुमार शर्मा, थाना अध्यक्ष रोशन कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सितेश झा, प्रधानाध्यापक और वार्डन की मौजूदगी में कार्यक्रम की शुरुआत हुई.
दीप प्रज्वलित कर शुरू हुए कार्यक्रम में अधिकारियों ने विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की और उनकी परेशानियों के बारे में जानकारी ली.
नौ छात्राओं ने रखीं अपनी समस्याएं
शिविर के दौरान कुल नौ छात्राओं ने अपनी-अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं. इनमें रोशनी से जुड़ी समस्या के साथ बाथरूम के टूटे दरवाजे का मुद्दा भी सामने आया.
बाथरूम का दरवाजा टूटे होने की शिकायत पर वार्डन ने उसे जल्द ठीक कराने का भरोसा दिया. इससे छात्राओं को अपनी दैनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्या के समाधान की उम्मीद जगी.
अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि शिविर में सामने आने वाली समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित स्तर पर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा.
‘बिना झिझक बताएं, आपकी समस्या दूर करने का प्रयास होगा’
सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को शिविर के उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि विद्यार्थियों को जहां भी परेशानी आती है, वे बिना किसी झिझक के उसे अधिकारियों के सामने रखें.
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी समस्या को दबाने के बजाय उसे सामने लाना जरूरी है. शिविर इसी उद्देश्य से बनाया गया है, ताकि समस्याओं को समझकर उनके समाधान का प्रयास किया जा सके.
उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया. कहा कि अधिकारों के साथ विद्यार्थियों के कुछ कर्तव्य भी हैं. शिक्षक और छात्र आपसी सहयोग से बेहतर माहौल तैयार कर सकते हैं.
अधिकारियों ने पढ़ाई और सुरक्षा पर भी की बातचीत
शिविर केवल शिकायत सुनने तक सीमित नहीं रहा. अधिकारियों ने विद्यार्थियों से पढ़ाई से जुड़े सवाल भी पूछे. देवेश कुमार शर्मा ने बच्चों से हिंदी और गणित से संबंधित जानकारी ली और उन्हें पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं. सरकार का प्रयास है कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें, ताकि वे आगे चलकर अच्छे नागरिक और जिम्मेदार पदाधिकारी बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें.
थाना अध्यक्ष रोशन कुमार ने छात्राओं से सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की. छात्राओं ने बताया कि उन्हें संस्थान में फिलहाल किसी तरह की परेशानी नहीं है. उन्होंने कहा कि भविष्य में कोई समस्या सामने आती है तो वे पुलिस को सूचना देंगी.
दो संस्थानों में नहीं मिली कोई शिकायत
केजीबीवी उर्दू मध्य विद्यालय सूरजापुर और राजकीय डिग्री कॉलेज प्रतापगंज में आयोजित विद्यार्थी सहयोग शिविर में विद्यार्थियों ने किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं करायी.
अधिकारियों ने विद्यार्थियों से कहा कि वर्तमान में समस्या नहीं है, फिर भी भविष्य में कोई शैक्षणिक, सुरक्षा या मूलभूत सुविधा से जुड़ी परेशानी सामने आती है तो उसे संबंधित अधिकारियों तक जरूर पहुंचाएं.
Vidyarthi Sahayog Camp: हर महीने चौथे मंगलवार को लगेगा शिविर
विद्यार्थी सहयोग शिविर को नियमित व्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी है. प्रत्येक महीने के चौथे मंगलवार को विद्यार्थियों के लिए इस तरह का शिविर आयोजित किया जाएगा.
इस व्यवस्था से स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा. खासकर छात्राओं के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि वे कई बार छोटी समस्याओं को भी सामने रखने में संकोच करती हैं.
मंगलवार को आयोजित शिविर के बाद विद्यार्थियों में भी उत्साह नजर आया. अधिकारियों से सीधे बातचीत करने और अपनी बात रखने का अवसर मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा. उनके चेहरे पर कार्यक्रम को लेकर खुशी भी दिखाई दी.
