यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्लीपर बसों की हुई जांच

सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर किया गया जुर्माना

– सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर किया गया जुर्माना सुपौल. परिवहन विभाग द्वारा स्लीपर बसों के निर्माण एवं संचालन से जुड़े निर्धारित सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन के निर्देशों के आलोक में जिला परिवहन कार्यालय द्वारा जिले में संचालित सभी स्लीपर बसों की सघन जांच अभियान चलाया गया. यह कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा राजस्थान में हुई स्लीपर बस दुर्घटना के बाद की गई. जांच एवं उसकी अनुशंसाओं के आधार पर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों के क्रम में की गई है. जांच के दौरान यह विशेष रूप से देखा गया कि स्लीपर बसों में बॉडी निर्माण, गैंगवे, सीटों की संख्या एवं उनके बीच की दूरी, आपातकालीन निकास द्वार, फायर एक्सटिंग्विशर, प्रेशर हॉर्न, रिफ्लेक्टिव टेप, वीएलटीडी, एसएलडी सहित सभी सुरक्षा उपकरण केंद्रीय मोटर वाहन नियमावली, 1989 तथा एआईएस-052 एवं एआईएस-119 के अनुरूप हैं या नहीं. जिला परिवहन पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार सज्जन के निर्देश पर मोटरयान निरीक्षकों की टीम ने जिले की स्लीपर बसों की गहन भौतिक जांच की. मिली कई प्रकार की खामियां इस दौरान कई बसों में गंभीर खामियां पाई गईं. इस दौरान बसों में आपातकालीन द्वार का अभाव, फायर फाइटिंग उपकरण की अनुपलब्धता, गैंगवे एवं सीट व्यवस्था में कमी, रिफ्लेक्टिव टेप और अन्य सुरक्षा उपकरणों की कमी देखी गयी. ऐसी बसों को तत्काल सुधारात्मक निर्देश जारी किए गए और मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत नियमानुसार अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया. नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों से निर्धारित दर पर जुर्माना वसूला गया. बस मालिकों को दी गयी चेतावनी बस मालिकों को कड़ी चेतावनी दी गई कि बिना सुरक्षा मानकों के बस संचालन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा. जिला परिवहन पदाधिकारी डॉ संजीव कुमार सज्जन ने बताया कि स्लीपर बसों में थोड़ी-सी लापरवाही भी यात्रियों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं की रोकथाम और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. बस मालिकों और ऑपरेटरों से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों का निर्माण, फिटनेस और संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार रखें. किसी भी प्रकार के अनाधिकृत बॉडी निर्माण या अवैध बदलाव से बचें. साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों पर ध्यान दें. यदि किसी बस में आपातकालीन दरवाजा, फायर एक्सटिंग्विशर, सीट बेल्ट, रिफ्लेक्टिव टेप या अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो, तो इसकी सूचना जिला परिवहन कार्यालय या नजदीकी परिवहन पदाधिकारी को दें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >