वैदिक मंत्रोच्चार व गाजे-बाजे के साथ निकाली गयी कलश यात्रा 1100 कन्याओं की कलश यात्रा बना आस्था का अद्भुत दृश्य हरिद्रा नदी तट पर कलश में भरा गया मंगल जल सुपौल. सदर प्रखंड अंतर्गत बरुआरी पश्चिम स्थित दुर्गा स्थान मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सह शतचंडी यज्ञ का शुभारंभ रविवार को भव्य व ऐतिहासिक कलश यात्रा के साथ हुआ. पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा व उत्साह का माहौल देखने को मिला. वैदिक मंत्रोच्चार, गाजे-बाजे और जयघोष के बीच निकली कलश यात्रा में 1100 से अधिक कन्याओं व युवतियों ने भाग लेकर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया. कलश यात्रा को विधान परिषद सदस्य अजय कुमार सिंह व जिला परिषद सदस्य रजनीश कुमार सिंह ने यज्ञ स्थल पर नारियल फोड़ कर व हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. जैसे ही कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ, पूरा वातावरण जय माता दी, हर-हर महादेव और श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी के जयघोष से गूंज उठा. भक्तिमय गीत-संगीत और ढोल-नगाड़ों की गूंज ने श्रद्धालुओं के मन में आस्था का संचार कर दिया. 11 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा, हर कदम पर श्रद्धा का सैलाब कलश यात्रा यज्ञ स्थल दुर्गा स्थान मंदिर परिसर से निकलकर बरुआरी पूरब, बरैल, सिमरा चौक, जगतपुर होते हुए बरुआरी स्थित कपिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर पहुंची. यह यात्रा करीब 11 किलोमीटर लंबी रही. यात्रा मार्ग के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही. गांव-टोले क्षेत्रों में लोगों ने पुष्प वर्षा कर, जल की व्यवस्था कर और श्रद्धापूर्वक स्वागत कर कलश यात्रा का अभिनंदन किया. कलश धारण किये कन्याओं व युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश रखे पूरे मार्ग को भक्ति से सराबोर कर दिया. उनके चेहरे पर उत्साह और आंखों में आस्था की चमक साफ झलक रही थी. हरिद्रा नदी तट पर विधि-विधान से हुआ पूजन कपिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर पहुंचने के बाद हरिद्रा नदी के तट पर यज्ञ के यजमान को आचार्य कृष्णानंद जी शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना करायी गयी. इसके पश्चात यज्ञ में शामिल यजमानों व कलश लिये महिलाओं और युवतियों ने हरिद्रा नदी से मंगल जल भरा. इस दौरान नदी तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. मंगल जल भरने के बाद पुनः कलश यात्रा यज्ञ स्थल की ओर लौटी. यात्रा के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता देखने को मिला. आयोजन समिति व स्वयंसेवकों द्वारा पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की गयी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई. जनप्रतिनिधियों ने की आयोजन की सराहना इस अवसर एमएलसी अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, एकता और सद्भावना को मजबूत करते हैं. शतचंडी यज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा जैसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी कार्य करते हैं. वहीं जिला परिषद सदस्य रजनीश कुमार सिंह ने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में कन्याओं और युवतियों की सहभागिता यह दर्शाती है कि आज भी समाज में धार्मिक आस्था और परंपराएं जीवंत हैं. उन्होंने क्षेत्रवासियों से पूरे आयोजन में सहयोग बनाए रखने की अपील की. 19 से 27 जनवरी तक होगा प्रवचन आयोजन समिति ने जानकारी दी कि श्रीमद्भागवत कथा सह शतचंडी यज्ञ के अंतर्गत 19 जनवरी से 27 जनवरी तक प्रतिदिन आचार्य द्वारा प्रवचन का आयोजन किया जायेगा. इस दौरान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भागवत कथा के गूढ़ रहस्यों व देवी उपासना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला जायेगा. प्रवचन स्थल पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ और कथा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गयी है. श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वयंसेवकों की टीम भी तैनात की गयी है. क्षेत्र में बना उत्सवी माहौल कलश यात्रा के साथ ही पूरे बरुआरी पश्चिम व आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बन गया है. घर-घर में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया है. ग्रामीणों में आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे सभी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. स्थानीय लोगों ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन से क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. आपसी भाईचारा मजबूत होता है. कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से भी इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे हैं. सामाजिक व सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना आयोजन श्रीमद्भागवत कथा सह शतचंडी यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनकर उभरा है. विभिन्न वर्गों, समुदायों और आयु समूहों के लोगों की सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है. आयोजन समिति ने बताया कि यज्ञ के समापन पर पूर्णाहुति, हवन और महाप्रसाद का आयोजन किया जायेगा. इसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है. समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा-प्रवचन का लाभ उठाएं और आयोजन को सफल बनाएं.
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