बिना मिट्टी वर्क के ही बना दी सड़क, जल निकासी व्यवस्था नहीं

स्कूल जाने के लिए पानी में घुसकर जाने को मजबूर बच्चे

– निर्मली पंचायत में हल्की बारिश ने प्रशासनिक दावों की खोली पोल – ग्रामीण सड़क पर दो फीट तक पानी जमा – स्कूल जाने के लिए पानी में घुसकर जाने को मजबूर बच्चे कटैया-निर्मली. पिपरा प्रखंड क्षेत्र के निर्मली पंचायत में हल्की बारिश ने ही प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है. वार्ड नंबर सात में जल निकासी की व्यवस्था न होने से मुख्य ग्रामीण सड़क पर दो फीट तक पानी जमा हो गया है. इससे सैकड़ों ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित है. निर्मली बाजार से हरदी दुर्गा स्थान को जोड़ने वाली व्यस्त ग्रामीण पक्की सड़क है. दुखा मंडल और कमल मंडल घर के सामने करीब 1 सौ मीटर लंबाई में सड़क पर दो फीट तक बारिश का पानी जमा है, जहां सड़क पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी है. जलजमाव के कारण स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और बाइक सवारों को भारी परेशानी हो रही है. बच्चे स्कूल जाने के लिए पानी में घुसकर जाने को मजबूर हैं. कई बार बाइक सवार फिसलकर गिर भी चुके हैं. मरीजों को अस्पताल ले जाने में एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पा रही. स्थानीय दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क के दोनों ओर नाली का निर्माण कभी नहीं कराया गया. सड़क गहरी है और आसपास के घर ऊंचे हैं, जिससे बारिश का सारा पानी सड़क पर ही जमा हो जाता है. हल्की बारिश में जब यह हाल है तो मानसून की तेज बारिश में स्थिति और भयावह हो जाएगी और पूरा रास्ता बंद होने का खतरा है. ग्रामीण उमाशंकर मंडल, सुरेश मंडल, दिनेश मंडल, सत्य नारायण मंडल, शिव नारायण मंडल, राम नारायण मंडल, देव नारायण मंडल, ओमप्रकाश कुमार, मो अब्बास, मो सलीम, मो नईम, मो इदरीस, मो केलू, श्री प्रसाद मेहता, प्रिंस कुमार, गोलू कुमार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि हर साल बारिश में यही समस्या होती है. नाली निर्माण के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई. विकास के नाम पर बिना मिट्टी वर्क के ही सड़क बना दी गई, लेकिन जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, प्रखंड विकास पदाधिकारी से मांग की है कि मानसून से पहले सड़क के दोनों ओर पक्की नाली का निर्माण कराया जाए. साथ ही जमा पानी को निकालने की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और लोगों का आवागमन सुचारू हो सके. बारिश शुरू होते ही पिपरा प्रखंड की दर्जनों सड़कों पर जलजमाव की समस्या आम हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि हर साल करोड़ो की लागत से बनने वाली सड़कों के साथ ड्रेनेज सिस्टम क्यों नहीं बनाया जाता.

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