सुपौल से रोशन सिंह की रिपोर्ट: सदर प्रखंड अंतर्गत एकमा पंचायत में रेलवे भूमि से हटाए गए भूमिहीन परिवारों के लिए जिला प्रशासन की ओर से राहत की पहली खेप पहुंचाई गई है. अंचल अधिकारी (सीओ) आनंद कुमार मंडल ने करीब 30 प्रभावित परिवारों के बीच प्लास्टिक शीट (तिरपाल) का वितरण किया, ताकि इन परिवारों को तपती धूप, उमस और संभावित बारिश से अस्थायी रूप से बचाया जा सके.
अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद बेघर हुए थे परिवार
मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में रेलवे विभाग द्वारा अपनी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया गया था. इस दौरान रेलवे की जमीन पर वर्षों से झोपड़ी डालकर रह रहे कई भूमिहीन परिवारों के आशियाने को हटाकर भूमि खाली करा ली गई. अचानक हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दर्जनों परिवार एक झटके में बेघर हो गए और उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो गया. इस भीषण गर्मी के मौसम में खुले आसमान के नीचे रहने के कारण बच्चों और महिलाओं की स्थिति काफी दयनीय हो गई थी.
युवा कांग्रेस नेता की पहल पर जागा प्रशासन
इस गंभीर और मानवीय संकट को देखते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के बिहार प्रदेश सचिव लक्ष्मण कुमार झा ने सक्रियता दिखाई. उन्होंने प्रभावित परिवारों की सुध लेते हुए अंचल अधिकारी आनंद कुमार मंडल से मुलाकात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि जब तक इन बेसहारा प्रभावित परिवारों के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उन्हें अस्थायी शेड या तिरपाल जैसी बुनियादी सुविधाएं दी जाएं ताकि वे सुरक्षित रह सकें.
स्थायी पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए सरकार
राहत वितरण के दौरान लक्ष्मण कुमार झा ने सरकार से भूमिहीन परिवारों के लिए स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की पुरजोर मांग उठाई. उन्होंने कहा:
“गरीब और बेसहारा लोगों को बार-बार उजाड़ दिए जाने की त्रासदी का सामना करना पड़ता है. इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार को जल्द से जल्द कोई ठोस नीति बनाकर इन परिवारों को बासगीत का पर्चा या पुनर्वास योजना के तहत जमीन आवंटित करनी चाहिए.”
दूसरी ओर, सीओ आनंद कुमार मंडल ने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी समस्याओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और नियमानुसार आगे की आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है. प्लास्टिक शीट वितरण के इस मौके पर अंचल कर्मियों के अलावा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे.
