सुपौल. जिले में कार्यरत ग्राम रक्षा दल एवं पुलिस मित्र सदस्यों ने अपने वर्षों से किए जा रहे सेवाभाव के बावजूद मानदेय और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर गहरी नाराजगी जताई. जिलों के ग्राम रक्षा दल सदस्यों ने संयुक्त रूप से अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखी है. सदस्यों ने बताया कि पंचायती राज अधिनियम 2004 एवं 2006 व संयुक्त निदेशक सह संयुक्त सचिव पंचायती राज विभाग के निर्देशों के आलोक में वे वर्षों से पंचायत क्षेत्रों में रात्रि पहरी, स्कूलों की सुरक्षा, राष्ट्रीय पर्वों, लोकसभा-विधानसभा चुनाव, कोरोना महामारी जैसी आपदाओं के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को सहयोग करते आ रहे हैं. कुछ जिलों में पुलिस अधीक्षक के माध्यम से लाठी, टॉर्च जैसी सामग्री दी गई है और उपस्थिति भी दर्ज की जाती है, लेकिन इसके बदले कोई नियमित मानदेय या दैनिक भत्ता नहीं मिलता. ग्रामीण पुलिस मित्र सदस्यों ने कहा कि बिना किसी पारिश्रमिक के लगातार कार्य करना उनके लिए आजीविका के संकट का कारण बन रहा है. उन्होंने मांग की है कि पंचायत सरकार भवनों में सुरक्षा कर्मी व सफाई कर्मी के रूप में समायोजन किया जाए. मनरेगा के तहत पौधरोपण के बाद पौधों की देख-रेख की जिम्मेदारी दी जाए. स्कूलों एवं ग्राम कचहरी की सुरक्षा में नियोजन किया जाए तथा आपदा मित्र के रूप में बाढ़, भूकंप जैसी आपदाओं में कार्य के लिए दैनिक भत्ता प्रदान किया जाए. इसके साथ ही राष्ट्रीय त्योहारों, दुर्गा पूजा, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस एवं आम सभाओं में प्राथमिकता, मानदेय, या दैनिक भत्ता तय करने, ग्रामीण पुलिस की नियुक्ति में प्राथमिकता देने तथा पंचायती राज अधिनियम के तहत आयु सीमा 18 से 30 वर्ष से बढ़ाकर 18 से 52 वर्ष करने की भी मांग रखी गई है. ग्राम रक्षा दल के सदस्यों ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि उनकी समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर विधानसभा सत्र में इसे उठाया जाए. ताकि वर्षों से सेवा दे रहे इन स्वयंसेवकों को सम्मानजनक मानदेय और सुविधाएं मिल सकें. इस अवसर पर जिलाध्यक्ष बजरंग कुमार, दीपेन्द्र कुमार पाण्डेय, बलराम यादव, हीरा लाल यादव, शंभू सिंह, सविता देवी, कंचन देवी, जयराम गुप्ता, विनोद कुमार राय आदि मौजूद थे.
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