गेंडा नदी पर बन रहे पुल में गुणवत्ता से खिलाड़, ग्रामीणों ने डीएम से की कार्रवाई की मांग

संवेदक पुल की गुणवत्ता व मजबूती से कर रहे हैं खिलवाड़

छातापुर. प्रखंड अंतर्गत जीवछपुर पंचायत से मधुबनी सीमा तक जाने वाली सड़क के मध्य स्थित गेंडा नदी पर निर्माणाधीन पुल में गुणवत्ता की अनदेखी से ग्रामीण आक्रोशित हैं. मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत सात करोड़ से अधिक की लागत से उच्च स्तरीय पुल के निर्माण पर अनियमितता के आरोप लगाये जा रहे हैं. आक्रोशित ग्रामीणों ने गुरुवार को कार्य स्थल पर पहुंच कर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग पर विरोध जताया. वहीं जिलाधिकारी से जांच करा कार्रवाई की मांग की है. कार्य स्थल पर लगे योजना बोर्ड के अनुसार करीब 97 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण दिसंबर 2027 तक पूरा करना है. ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल त्रिवेणीगंज के कार्यपालक अभियंता योजना के कार्य एजेंसी हैं, जबकि संवेदक के रूप में रॉबष्ट इंजीकॉन प्राइवेट लिमिटेड का नाम अंकित है.

संवेदक पुल की गुणवत्ता व मजबूती से कर रहे हैं खिलवाड़

स्थल पर पहुंचे बजरंग दल विभाग संयोजक कोशी मुकेश कुमार यादव, परमेश्वर साह, नेपाली साह, ललन यादव, अरविंद कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि विभागीय अभियंता की मिली भगत से संवेदक पुल की गुणवत्ता और मजबूती से खिलवाड़ कर रहे हैं. अभियंता की गैरमौजूदगी में किये जा रहे निर्माण कार्य में गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी की जा रही है. बताया कि निर्माण के दौरान बिना फुटिंग का पानी साफ किए ही देर रात के समय कंक्रीट ढलाई की जाती है. टुडू पंप से पानी निकालने के कारण अधिकांश सीमेंट बह जाता है. केवल गिट्टी व बालू ही रह जाता है. जिससे पुल निर्माण की मजबूती पर सवाल उठना लाजिमी है. इतना ही नहीं, पाइलिंग के ऊपरी हिस्से को नियम के अनुसार लेबर से तोड़ने के बजाय मशीन (पोकलेन) से तोड़ा जा रहा है. जिससे सरिया बेंड हो जा रहा है. वहीं कार्य के दौरान सरिया को काटने में घरेलू एलपीजी गैस का उपयोग भी हो रहा रहा है. बताया कि संवेदक रात के अंधेरे में मनमाने ढंग से अधिकांश कार्य को अंजाम दे रहा है. सभी स्तरों पर हो रहे गुणवत्ताविहीन निर्माण के कारण पुल के टिकाऊपन को लेकर इलाके वासियों की चिंता बढ़ गई है.

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि कोई व्यक्ति निर्माण कार्य पर सवाल उठाता है तो साइट पर मौजूद संवेदक के गुर्गों द्वारा संगीन मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है. इसके कारण भी ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. यह भी बताया कि इस पुल की मांग पिछले 17 वर्षों से की जा रही थी, अब जब निर्माण शुरू हुआ है तो गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

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