कैदियों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर बुधवार को वीरपुर उपकारा में कैदियों के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया.

वीरपुर उपकारा में कैदियों के लिए जागरूकता शिविर का किया गया आयोजन वक्ताओं ने मानवाधिकारों के महत्व और कैदियों की गरिमा की रक्षा पर दिया जोर सुपौल. अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर बुधवार को वीरपुर उपकारा में कैदियों के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य कैदियों को उनके मानवाधिकारों, उपलब्ध कानूनी सहायता, पुनर्वास संबंधी प्रावधानों और जेल प्रशासन की सुविधाओं के बारे में जागरूक करना था. कार्यक्रम में वीरपुर एसीजेएम अमित आनंद, वरीय उप समाहर्ता मुकेश कुमार, प्रोबेशन पदाधिकारी शुभम, डीएलएसए प्रतिनिधि संजय सिंह सहित अन्य गण्यमान अधिकारी मौजूद थे. सभी वक्ताओं ने मानवाधिकारों के महत्व और कैदियों की गरिमा की रक्षा पर जोर दिया. अधिकारियों ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार प्रत्येक नागरिक के समान हैं और कारागार में बंद कैदी भी इन अधिकारों के हकदार हैं. वक्ताओं ने कारागार परिसर में उपलब्ध सुविधाओं, कैदियों की सुरक्षा और सम्मानजनक व्यवहार से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा की. बताया कि कैदियों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. जेल प्रशासन और न्यायालय लगातार उनके कल्याण के लिए सक्रिय रहते हैं. पुनर्वास, सुधार और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. शिविर में कैदियों को बताया गया कि डीएलएसए (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण) जरूरतमंद कैदियों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है. इसके अलावा प्रोबेशन और पुनर्वास से संबंधित योजनाओं की भी जानकारी दी गयी, ताकि कैदी रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें. कार्यक्रम के दौरान कैदियों के बीच मानवाधिकार संबंधी पुस्तिकाएं वितरित की गयी, जिससे वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ सके. अधिकारियों ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कैदियों में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कारागार में मानवोचित वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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