नील गाय के आतंक से किसान परेशान, किसानों ने डीएम से लगाई गुहार

गेहूं, मक्का, सूर्यमुखी और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही है

त्रिवेणीगंज. प्रखंड क्षेत्र में नील गाय का बढ़ता आतंक किसानों के लिए गंभीर समस्या बन गया है. पिलुवाहा पंचायत के लक्ष्मीनियां और महोलिया मौजा सहित कोरियापट्टी पश्चिम पंचायत के कई गांवों में नील गाय की झुंड लगातार खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही है. स्थिति यह है कि गेहूं, मक्का, सूर्यमुखी और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की फसलें बर्बाद हो रही है. जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है. प्रभावित गांवों के सैकड़ों किसानों ने सामूहिक हस्ताक्षरयुक्त आवेदन डीएम को ईमेल के माध्यम से भेजकर नील गाय के आतंक से मुक्ति दिलाने की मांग की है. किसानों का कहना है कि वे दिन-रात कड़ी मेहनत कर अपनी फसल तैयार करते हैं. खेतों की रखवाली भी करते हैं. लेकिन थोड़ी सी चूक होते ही नील गाय की झुंड खेतों में घुसकर तैयार फसल को खाने के साथ-साथ पैरों तले रौंदकर नष्ट कर देती है. लक्ष्मीनियां और महोलिया मौजा के दर्जनों किसानों ने बताया कि इस बार मक्का, गेहूं, सूर्यमुखी और सब्जी जैसी फसलों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. कई किसानों का कहना है कि फसल की लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है. लगातार हो रहे नुकसान से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों में विशेष अभियान चलाकर नील गाय को पकड़ने, सुरक्षित स्थान पर भेजने या अन्य प्रभावी उपाय तत्काल किए जाएं. ताकि आगे फसलों की बर्बादी रोकी जा सके. उनका कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. नील गाय से प्रभावित किसानों में ई मिथिलेश कुमार यादव, अनिल यादव, अर्जुन यादव, शत्रुघ्न यादव, लखन यादव, जयकृष्ण यादव, अरविंद यादव, भिखेंद्र यादव, सनमोल यादव, अनुरुद्ध यादव, धरम यादव, ब्रह्मदेव यादव, भूपेंद्र यादव, मो इलाही, मो तौहीद, मो जुम्माउद्दीन, जागो मंडल, रघुनंदन सरदार, गोपाल सिंह, कमल शर्मा, उपेंद्र मेहता, अमरेंद्र मेहता, देवेंद्र मेहता, शैलेंद्र यादव, बालो यादव, हरि प्रसाद यादव सहित अन्य किसान शामिल हैं. मामले को लेकर एसडीएओ मुकेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित पंचायतों के मुखिया द्वारा आवेदन मिलने पर जांचोपरांत कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर उसको हटाने के लिए पटना से नील गाय को शूटआउट करने के लिए टीम बुलायी जाएगी. नील गाय से फसलों को क्षति होने पर मुआवजा का कोई प्रावधान नहीं है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >