''''मिथिला शुभाशीष यात्रा'''' पर निकली प्रिया मल्लिक

मिथिला की गायकी से मुंबई तक का किया सफर

– मिथिला की गायकी से मुंबई तक का किया सफर राघोपुर. मिथिला की सांस्कृतिक धरती पर जन्मी और लोकगीतों से अपनी पहचान बनाने वाली प्रसिद्ध गायिका प्रिया मल्लिक इन दिनों अपनी नई मैथिली फिल्म ‘शुभे हो शुभे’ की सफलता के लिए मिथिला की धरती पर आशीर्वाद यात्रा पर निकली हुई हैं. मंगलवार को वे सुपौल जिले के गनपतगंज स्थित प्रसिद्ध विष्णु मंदिर पहुंचीं. जहां उन्होंने भगवान बरदराज से आशीर्वाद लेकर अपने नए सिनेमाई सफर की शुरुआत को पावन स्पर्श दिया. इसके साथ ही उन्होंने धरहरा स्थित बाबा भीमशंकर नाथ मंदिर में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया. बताया कि उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक या प्रचारात्मक नहीं, बल्कि भावनात्मक और पारंपरिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण है. मिथिला की संस्कृति में किसी भी कार्य की शुरुआत ईश्वर और बुजुर्गों के आशीर्वाद से की जाती है. इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए उन्होंने ‘मिथिला शुभाशीष यात्रा’ की शुरुआत की है. यह यात्रा कटिहार की कालीबाड़ी मंदिर से प्रारंभ हुई और इसका समापन दरभंगा स्थित श्यामा माई मंदिर में मां काली की पूजा के साथ होगा. बातचीत में प्रिया मल्लिक ने खुलासा किया कि उनकी प्रेरणा प्रसिद्ध लोकगायिका शारदा सिन्हा हैं. शारदा सिन्हा की ही तरह प्रिया ने भी मैथिली, भोजपुरी और हिन्दी गीतों के माध्यम से लोकसंगीत को एक नया आयाम देने का कार्य किया है. उन्होंने बताया कि उनका पहला गीत ‘मिथिला नगरिया निहाल सखिया’ था, जो मिथिला क्षेत्र में काफ़ी लोकप्रिय हुआ. इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘भुज’ से इंडस्ट्री में कदम रखा और फिर महारानी-3, चमक, शिक्षा मंडल जैसी वेब सीरीज में अपनी आवाज़ दी. उनकी भोजपुरी फोक सांग ‘हाथी लेवे, घोड़ा लेवे’ भी काफी चर्चित रही है. मैथिली और भोजपुरी गीतों को अपनी आवाज़ से सजाकर उन्होंने इस क्षेत्रीय संगीत को देशभर में पहुंचाया है. प्रिया मल्लिक न केवल गायिका हैं, बल्कि अब मैथिली सिनेमा को नया आयाम देने की दिशा में भी काम कर रही हैं. ‘शुभे हो शुभे’ उनकी पहली मैथिली फिल्म है, जिसकी कहानी, संगीत और प्रस्तुति पूरी तरह से मिथिला की संस्कृति और परंपरा को समर्पित है. उन्होंने बताया कि मैथिली भाषा न केवल मीठी और दिल को छूने वाली है, बल्कि इसमें अपार सांस्कृतिक धरोहर छुपी है. वे चाहती हैं कि मैथिली सिनेमा भी भोजपुरी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की तरह वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >